सोमवार 26 अक्टूबर 2026 - 20:28
ईमान, एकता और क्रांति के नेता का अनुसरण ईरान की शक्ति का आधार है

ईरान के पवित्र नगर क़ुम में ‘ईरान : ईश्वरीय सिद्धांतों की रोशनी में दुनिया की पहली शक्ति’ विषय पर आयोजित पांचवीं बैठक में वक्ताओं ने पवित्र कुरआन की शिक्षाओं, इस्लामी इतिहास और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में ईरान की शक्ति का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि किसी देश की ताकत का आकलन केवल सैन्य उपकरणों और आर्थिक संसाधनों के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि ईमान, जनएकता, दृढ़ता और ईश्वरीय वादों पर विश्वास भी राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पवित्र नगर क़ुम में ‘ईरान : ईश्वरीय सिद्धांतों की रोशनी में दुनिया की पहली शक्ति’ विषय पर आयोजित पांचवीं बैठक में वक्ताओं ने पवित्र कुरआन की शिक्षाओं, इस्लामी इतिहास और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में ईरान की शक्ति का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि किसी देश की ताकत का आकलन केवल सैन्य उपकरणों और आर्थिक संसाधनों के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि ईमान, जनएकता, दृढ़ता और ईश्वरीय वादों पर विश्वास भी राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं।

ईमान, एकता और क्रांति के नेता का अनुसरण ईरान की शक्ति का आधार है

इस बैठक में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुजतबा कलबासी, नजफ लकज़ाई और महदी रस्तमनेजाद ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कुरआन की आयतों और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए ईरान की वर्तमान स्थिति तथा अमेरिका और इज़राइल के मुकाबले उसकी प्रतिरोध क्षमता पर चर्चा की।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुजतबा कलबासी ने कहा कि पवित्र कुरआन में सफलता और विजय के लिए ईमान तथा ईश्वरीय आदेशों पर अमल करने के महत्व को स्पष्ट किया गया है। उन्होंने सूरह आले इमरान की आयत “وَأَنْتُمُ الْأَعْلَوْنَ إِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِنِينَ” का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक श्रेष्ठता का संबंध ईमान से है।

उन्होंने कहा कि श्रेष्ठता का एक रूप वह है, जो सत्य और न्याय पर आधारित होता है, जबकि दूसरा रूप अत्याचार, दूसरों को कमजोर करने और उन पर प्रभुत्व स्थापित करने से उत्पन्न होता है।

ईमान, एकता और क्रांति के नेता का अनुसरण ईरान की शक्ति का आधार है

उन्होंने कहा कि ईश्वर की सहायता का वादा उन लोगों के लिए है, जो सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहते हैं और न्याय की स्थापना के लिए प्रयास करते हैं। उनके अनुसार, ज़ायोनी शासन के अत्याचारों के मुकाबले ईरान के प्रतिरोध को इसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए। उन्होंने इस संघर्ष में शहीद नेता, सैन्य कमांडरों और बच्चों के बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वरीय वादों पर विश्वास, धैर्य और दृढ़ता इस संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

कलबासी ने सफवी दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान के इतिहास में धार्मिक मान्यताओं और उन पर अमल का देश की शक्ति पर प्रभाव देखा जा सकता है। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में भी धैर्य, प्रतिरोध, एकता और नेतृत्व का अनुसरण सफलता के महत्वपूर्ण कारक हैं।

बैठक के दूसरे वक्ता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नजफ लकज़ाई ने ईरान और अमेरिका तथा इज़राइल के बीच जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान की शक्ति को केवल भौतिक संसाधनों के पैमाने पर नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के संबंधों में लगातार तनाव बना रहा है और अमेरिका ने विभिन्न दौर में ईरान पर दबाव डालने की कोशिश की है।

उन्होंने 28 मोर्दाद 1332 हिजरी शम्सी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान के प्रति अमेरिका की विरोधी नीतियों का सिलसिला इस्लामी क्रांति के बाद भी जारी रहा। उनके अनुसार, 12 दिवसीय और 39 दिवसीय युद्धों के अनुभवों ने ईरान की प्रतिरोध क्षमता और उसकी सामर्थ्य से जुड़े कई सवालों को सामने लाया।

लकज़ाई ने कुरआन की आयत “أَنَّ الْقُوَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا” का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक शक्ति का स्रोत अल्लाह है। इसलिए किसी देश की ताकत का आकलन करते समय भौतिक संसाधनों के साथ-साथ आध्यात्मिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

उन्होंने जंग-ए-बद्र और जंग-ए-अहज़ाब का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जब संख्या और बाहरी संसाधनों की कमी के बावजूद मुसलमानों ने सफलता प्राप्त की।

उन्होंने पश्चिमी विचारकों मिशेल फूको और जोसेफ नाए का उल्लेख करते हुए इस्लामी क्रांति की आध्यात्मिक शक्ति और उसके जनसामान्य पर प्रभाव की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, ईमान, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनता का समर्थन ऐसे कारक हैं, जिन्हें किसी देश की शक्ति का आकलन करते समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईमान, एकता और क्रांति के नेता का अनुसरण ईरान की शक्ति का आधार है

बैठक के तीसरे वक्ता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन महदी रस्तमनेजाद ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सत्य और असत्य के बीच संघर्ष को समझने के लिए पवित्र कुरआन की शिक्षाओं से मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने विलायत और क्रांति के नेता के अनुसरण को सामूहिक सफलता के महत्वपूर्ण कारकों में शामिल किया।

उन्होंने जंग-ए-उहुद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना में मुसलमानों को आपसी मतभेद, आदेशों की अवहेलना और आंतरिक कमजोरी के कारण नुकसान उठाना पड़ा था।

उन्होंने कहा कि ईरान की वर्तमान स्थिति को भी इसी संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, आंतरिक एकता, जनता की जागरूकता और नेतृत्व के निर्देशों पर अमल करना इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि देश की क्षमताओं को वास्तविक सफलता में बदला जा सके। उन्होंने आंतरिक मतभेदों और घुसपैठ के खतरों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बैठक में वक्ताओं की चर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह था कि ईरान की शक्ति का आकलन केवल सैन्य और आर्थिक संसाधनों के आधार पर नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ईमान, जनएकता, नेतृत्व का अनुसरण, धैर्य और प्रतिरोध भी राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं। वक्ताओं ने पवित्र कुरआन की शिक्षाओं और इस्लामी इतिहास की घटनाओं के प्रकाश में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इन सिद्धांतों पर ध्यान देना ईरान के लिए विशेष महत्व रखता है।

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