बुधवार 28 अक्टूबर 2026 - 21:26
दिल्ली में सुन्नी उलेमा और मदरसों के जिम्मेदारों की जामेअतुल मुस्तफा के साथ बैठक

नई दिल्ली में सुन्नी उलेमा, धार्मिक मदरसों के जिम्मेदारों और जामेअतुल मुस्तफा भारत के प्रतिनिधि कार्यालय के बीच एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य सुन्नी उलेमा, बुद्धिजीवियों और मदरसों के जिम्मेदारों के साथ संपर्क तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देना था।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में सुन्नी उलेमा, धार्मिक मदरसों के जिम्मेदारों और जामेअतुल मुस्तफा भारत के प्रतिनिधि कार्यालय के बीच यह बैठक आयोजित हुई। इसका उद्देश्य धार्मिक विद्वानों, बुद्धिजीवियों और मदरसों के प्रबंधकों के साथ संवाद और सहयोग के अवसरों को मजबूत बनाना था।

जामेअतुल मुस्तफा भारत के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैनी ने सूरह अल-बक़रा की आयत 257 के प्रकाश में ज्ञान और जागरूकता के महत्व तथा समाज के प्रति उलेमा की जिम्मेदारियों पर चर्चा की।

उन्होंने ज्ञान को ईश्वरीय प्रकाश का एक प्रमुख उदाहरण बताते हुए कहा कि ईमान के साथ प्राप्त ज्ञान मनुष्य को अज्ञानता और गुमराही के अंधकार से निकालकर मार्गदर्शन के प्रकाश तक पहुंचाता है। उनके अनुसार, ईश्वर की विलायत के अंतर्गत प्राप्त ज्ञान मनुष्य को सत्य, विनम्रता और शांति की ओर ले जाता है, जबकि ईमान और ईश्वरीय मार्गदर्शन से रहित ज्ञान अत्याचार और विद्रोह का कारण बन सकता है।

उन्होंने हदीस “अल-उलमा वरसतुल अंबिया” अर्थात “उलेमा पैगंबरों के वारिस हैं” का उल्लेख करते हुए कहा कि पैगंबरों (अ.) की वास्तविक विरासत ज्ञान, विवेक और मार्गदर्शन है। इसी कारण उलेमा की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को ईश्वर की ओर बुलाएं, धार्मिक आदेशों का प्रचार करें, भलाई की ओर आमंत्रित करें और ईश्वरीय मूल्यों की रक्षा करें।

बैठक के समापन पर हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैनी ने जामेअतुल मुस्तफा की शैक्षिक और अकादमिक गतिविधियों, विशेष रूप से सुन्नी समुदाय के लिए निर्धारित विभाग का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि जामेअतुल मुस्तफा सभी इस्लामी विचारधाराओं से संबंधित लोगों को इस्लामी शिक्षाएं प्राप्त करने के अवसर प्रदान करता है। उन्होंने सुन्नी मदरसों के साथ विभिन्न शैक्षिक और अकादमिक क्षेत्रों में सहयोग करने की तत्परता भी व्यक्त की।

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