सोमवार 2 नवंबर 2026 - 18:37
इस्लामी क्रांति के बाद हौज़ा इल्मिया की गतिविधियों का विस्तार 100 से अधिक देशों तक हुआ: आयतुल्लाह आराफी

हौज़ा इल्मिया ईरान के प्रमुख ने कहा है कि इस्लामी क्रांति के बाद दुनिया के 100 से अधिक देशों में हौज़ा इल्मिया की शैक्षिक एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार हुआ है और अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए नए रास्ते खुले हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने क़ुम स्थित मदरसा इल्मिया हक़्क़ानी के शिक्षकों, विद्यार्थियों और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति और पिछले एक शताब्दी के दौरान क़ुम के हौज़ा इल्मिया में आने वाले बदलाव, हौज़ा इल्मिया के एक हज़ार साल के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हैं। इस क्रांति ने धार्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार के ऐसे नए रास्ते खोले हैं, जिनका अतीत में कोई उदाहरण नहीं मिलता।

मदरसा इल्मिया हक़्क़ानी के दौरे के दौरान उन्होंने इस संस्थान के शैक्षिक और प्रशिक्षण संबंधी महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि क़ुम और ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 ऐसे प्रतिष्ठित मदरसे हैं, जहां हौज़ा इल्मिया के योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मदरसा हक़्क़ानी भी इन्हीं महत्वपूर्ण संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषता यह है कि यहां से हौज़ा इल्मिया के भविष्य के लिए प्रभावशाली और योग्य व्यक्तित्व तैयार हो सकते हैं। यह स्थान जहां एक बड़ा सम्मान है, वहीं एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि इस्लामी क्रांति के बाद हौज़ा इल्मिया के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के व्यापक अवसर पैदा हुए हैं। आज दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक शिक्षा, प्रचार-प्रसार और अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं को फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर काम करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यदि हौज़ा इल्मिया की मौजूदा क्षमता में सौ गुना वृद्धि भी कर दी जाए, तब भी दुनिया की इन आवश्यकताओं को पूरा करना आसान नहीं होगा।

उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि हौज़ा इल्मिया की जिम्मेदारियों के सिलसिले में उन्हें दुनिया के दर्जनों देशों की यात्रा करने और 100 से अधिक देशों के हालात, वैचारिक रुझानों तथा धार्मिक आवश्यकताओं को करीब से समझने का अवसर मिला है। इस अनुभव के आधार पर उनका मानना है कि इस्लाम, इस्लामी क्रांति और धार्मिक शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आज असाधारण अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी सोच को केवल अपने क्षेत्र या सीमित परिवेश तक सीमित न रखें, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बदलावों को समझने की क्षमता विकसित करें। आज के विद्यार्थी के लिए आवश्यक है कि उसमें गहन शैक्षिक ज्ञान, व्यापक जानकारी, दूरदर्शिता, व्यापक दृष्टिकोण और आधुनिक आवश्यकताओं की समझ हो, ताकि वह दुनिया में उठने वाले सवालों के जवाब दे सके और धार्मिक शिक्षाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सके।

हौज़ा इल्मिया के इतिहास के महत्वपूर्ण दौर

हौज़ा इल्मिया के ऐतिहासिक बदलावों का उल्लेख करते हुए आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि पिछले एक हज़ार वर्षों के दौरान कई ऐसे महत्वपूर्ण दौर गुज़रे हैं, जिनमें विद्वानों ने शैक्षिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

उन्होंने पहले महत्वपूर्ण दौर को शेख मुफीद और शेख तूसी के समय से संबंधित बताया। उस दौर में बगदाद, क़ुम और रय के शैक्षिक केंद्रों में अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं को बढ़ावा मिला और शिया धर्मशास्त्र की शैक्षिक बुनियादें मजबूत हुईं।

दूसरा महत्वपूर्ण दौर मंगोलों के शासनकाल का था। इस दौरान ख़्वाजा नसीरुद्दीन तूसी और अल्लामा हिल्ली जैसे विद्वानों ने शैक्षिक एवं वैचारिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उस दौर की परिस्थितियों को सकारात्मक दिशा देने में प्रभावी योगदान दिया।

तीसरा महत्वपूर्ण दौर सफ़वी शासन से संबंधित है। इस दौरान मुहक़्क़िक़ करकी, शेख बहाई, मुल्ला सदरा और मीर दामाद जैसे महान विद्वानों ने शैक्षिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं अंजाम दीं। इन विद्वानों के प्रयासों से इस्फ़हान एक बड़े शैक्षिक केंद्र के रूप में उभरा और फिक़्ह, दर्शनशास्त्र, इल्मे कलाम, हदीस, वास्तुकला तथा सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य हुए।

उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक दौरों के बावजूद आधुनिक युग में क़ुम की सौ वर्षीय शैक्षिक एवं धार्मिक आंदोलन और इस्लामी क्रांति के परिणामस्वरूप आने वाले बदलाव अपने विस्तार और प्रभाव के लिहाज़ से इन सभी से आगे हैं। इसलिए आज के विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए उच्च शैक्षिक और नैतिक क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।

दुनिया के 100 से अधिक देशों में हौज़ा इल्मिया की गतिविधियों का विस्तार

आयतुल्लाह आराफी ने वर्तमान दौर की सबसे प्रमुख विशेषता हौज़ा इल्मिया के वैश्विक विस्तार को बताते हुए कहा कि पिछले एक हज़ार वर्षों के इतिहास में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अवसर पहले कभी पैदा नहीं हुए। आज क़ुम की शैक्षिक एवं प्रशिक्षण व्यवस्था से प्रभावित होकर दुनिया के 100 से अधिक देशों में धार्मिक शिक्षा और हौज़ा इल्मिया से संबंधित गतिविधियों की नींव रखी गई है।

उन्होंने कहा कि अफ्रीका के दूरदराज़ क्षेत्रों से लेकर यूरोप, अमेरिका, क़फ़क़ाज़, सुदूर पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया तक हौज़ा इल्मिया की गतिविधियों का विस्तार हो चुका है। शुरुआत में ईरानी विद्वानों ने विभिन्न देशों में जाकर इस कार्य की नींव रखी और बाद में स्थानीय लोगों ने भी धार्मिक शिक्षा प्राप्त करके इन जिम्मेदारियों को संभाला।

अंत में उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के परिणामस्वरूप दुनिया भर में धार्मिक शिक्षा से जुड़े लोगों का एक बड़ा समूह तैयार हुआ है, जिसने हौज़ा इल्मिया, अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं और इस्लामी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए नए क्षेत्र खोल दिए हैं। यह एक ऐतिहासिक अवसर होने के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसका पूरा लाभ उठाने के लिए हौज़ा इल्मिया के शिक्षकों और विद्यार्थियों को और अधिक मेहनत तथा गंभीरता के साथ आगे बढ़ना होगा।

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