हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई से भूले हुए तशह्हुद की क़ज़ा के संबंध में एक सवाल पूछा गया, जिसका जवाब उन्होंने दिया है। इसे पाठकों की जानकारी के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
भूले हुए तशह्हुद की क़ज़ा
सवाल: यदि नमाज़ में तशह्हुद पढ़ना भूल जाएं और नमाज़ के बाद भी उसकी क़ज़ा अदा करना भूल जाएं, तो ऐसी स्थिति में क्या कर्तव्य है?
जवाब: जब भी याद आए, एहतियाते वाजिब के अनुसार वुज़ू करके और क़िबले की ओर रुख़ करके तशह्हुद अदा करें। इसके बाद दो सज्दा-ए-सह्व बजा लाएं। इस स्थिति में आपकी नमाज़ सही है।
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