हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जामिया मख़ज़नुल उलूम अल-जाफ़रिया, मुल्तान के दो दिवसीय वार्षिक कार्यक्रम के अवसर पर मरकज़ अफ़कार-ए-इस्लामी पाकिस्तान के सहयोग से भव्य नहजुल बलाग़ा सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रमुख विद्वानों, बुद्धिजीवियों तथा बड़ी संख्या में मोमिनीन और मोमिनात ने भाग लिया।
इस वैचारिक और शैक्षणिक सम्मेलन को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अख़लाक़ हुसैन शीराज़ी, प्रोफ़ेसर डॉ. आबिद हुसैन ख़ान और हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मक़बूल हुसैन अलवी ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधनों में नहजुल बलाग़ा की शैक्षणिक और वैचारिक महानता, अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की सीरत और शिक्षाओं तथा वर्तमान दौर में इस महान पुस्तक की मार्गदर्शक भूमिका और उपयोगिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अख़लाक़ हुसैन शीराज़ी ने अपने संबोधन में नहजुल बलाग़ा की शिक्षाओं के महत्व को उजागर करते हुए अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की सीरत को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिए एक आदर्श बताया।
उन्होंने नहजुल बलाग़ा के अध्ययन और उसके संदेश को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
प्रोफ़ेसर डॉ. आबिद हुसैन ख़ान ने अपने संबोधन में नहजुल बलाग़ा के शैक्षणिक, वैचारिक और साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे मानवीय चेतना जगाने, वैचारिक परिपक्वता लाने और नैतिक प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया।

उन्होंने वर्तमान दौर की वैचारिक और सांस्कृतिक चुनौतियों के संदर्भ में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की शिक्षाओं की प्रासंगिकता और उनसे लाभ उठाने की आवश्यकता को स्पष्ट किया।
मरकज़ अफ़कार-ए-इस्लामी के संरक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मक़बूल हुसैन अलवी ने अपने संबोधन में नहजुल बलाग़ा के धार्मिक और नैतिक प्रशिक्षण संबंधी महत्व को बयान करते हुए इसके संदेश को समाज में आम करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
उन्होंने हज़रत अली (अ) की शिक्षाओं से परिचित होने, उनकी सीरत का अनुसरण करने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में न्याय, तक़वा, निष्ठा, विवेक और मानव सेवा जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के महत्व को उजागर किया।

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नहजुल बलाग़ा केवल एक शैक्षणिक और साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक जीवंत संविधान है। इसमें आस्था, नैतिकता, राजनीति, सामाजिक जीवन, न्याय और मानवाधिकार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शन मौजूद है। आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी को इस महान ज्ञानपरक विरासत से परिचित कराया जाए और इसकी शिक्षाओं को सरल भाषा में समाज तक पहुंचाया जाए।
सम्मेलन के समापन पर प्रतिभागियों ने नहजुल बलाग़ा के प्रचार-प्रसार और अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की शिक्षाओं को समाज में आम करने के लिए इस प्रकार की शैक्षणिक और वैचारिक बैठकों को महत्वपूर्ण बताया।
उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन जामिया मख़ज़नुल उलूम अल-जाफ़रिया, मुल्तान के दो दिवसीय वार्षिक कार्यक्रम के अवसर पर मरकज़ अफ़कार-ए-इस्लामी पाकिस्तान के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें मोमिनीन और मोमिनात ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर नहजुल बलाग़ा के प्रति अपनी श्रद्धा और लगाव व्यक्त किया।

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