हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हकीम मजीद इलाही ने हाल ही में इमारत-ए-शरिया, पटना का दौरा किया। इस दौरान इमारत-ए-शरिया के नाज़िम मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

इसके बाद इमारत-ए-शरिया के नायब नाज़िम मुफ़्ती मोहम्मद सोहराब नदवी क़ासमी ने संस्थान के विभिन्न कार्यों और सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हकीम मजीद इलाही ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉक्टर और इंजीनियर बनना आसान है, लेकिन मुफ़्ती और आलिम बनना कठिन है। इमारत-ए-शरिया इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय में एकता का माहौल बनाना भी प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि इमारत-ए-शरिया की सेवाओं की जितनी भी सराहना की जाए, कम है। आज इस संस्थान में आकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। इस संस्था ने मुसलमानों को वे सभी सुविधाएं और सेवाएं प्रदान की हैं, जो किसी धार्मिक संस्थान की जिम्मेदारी होती हैं। गरीबों की सहायता, जरूरतमंदों की देखभाल, समुदाय में शिक्षा को बढ़ावा देना, बीमारों का इलाज और बेसहारा लोगों की मदद करना ही इस्लाम का संदेश है। ये सभी कार्य इस ऐतिहासिक संस्थान के माध्यम से किए जा रहे हैं। इसके लिए हम अल्लाह का जितना शुक्र अदा करें, कम है।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हकीम मजीद इलाही ने मुस्लिम समुदाय के बीच एकता और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इमारत-ए-शरिया के उद्देश्यों में एकता को बढ़ावा देना भी शामिल है। इस माहौल को बनाए रखना और इसे और मजबूत करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
इस अवसर पर मौलाना तक़ी हैदर ने कहा कि हमारी एकता ही हमारी ताकत बन सकती है और इस ताकत को हासिल करने के लिए उलेमा का एकजुट होना आवश्यक है।

इस बैठक में इमारत-ए-शरिया के नायब नाज़िम मुफ़्ती मोहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी, सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी, सहायक नाज़िम मौलाना मोहम्मद अबुल कलाम शम्सी, डॉ. सैयद यासिर हबीब (सचिव, मौलाना सज्जाद मेमोरियल अस्पताल), मौलाना अरशद रहमानी (हाफ़िज़ सचिव), मौलाना मोहम्मद शारिक रहमानी (सहायक कार्यालय सचिव), मौलाना मोहम्मद नियाज़ आलम क़ासमी, एडवोकेट जावेद इक़बाल (ट्रस्टी, इमारत-ए-शरिया) और बिहार मजलिस-ए-उलेमा व ख़ुतबा के महासचिव मौलाना सैयद अमानत हुसैन सहित कई अन्य प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इमारत-ए-शरिया के साथ अपने गहरे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान की सेवाओं की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। इसकी विशेषता यह है कि यहां किसी की मदद उसके मत या संप्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि इंसानियत के आधार पर की जाती है।
झारखंड शिया पर्सनल बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने भी इमारत-ए-शरिया की सेवाओं की सराहना की और इस संस्थान के साथ अपने पुराने संबंधों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इमारत-ए-शरिया एक ऐसा केंद्र है, जिसमें बिहार, झारखंड और ओडिशा के मुसलमानों को एकजुट करके एक बड़ी ताकत में बदलने की क्षमता है।
बैठक में उपस्थित लोगों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत ने मुसलमानों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह ऐसी महान शहादत है, जिस पर केवल शिया समुदाय के लोग ही शोकाकुल नहीं हुए, बल्कि सभी एकेश्वरवादियों ने भी अपना दुख व्यक्त किया।
उलेमा ने कहा कि शहीद रहबर की कुर्बानी के परिणामस्वरूप एकता और आपसी भाईचारे का जो माहौल बना है, उसे भुलाना नहीं चाहिए, बल्कि इसे और अधिक बढ़ावा देना चाहिए। इसी तरह हम शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

मुफ़्ती मोहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी ने कहा कि ईरान की सफलता के लिए हर मुसलमान दुआ कर रहा था और मुसलमानों की दुआओं ने ईरान को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हकीम मजीद इलाही ने उपस्थित लोगों की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय ने केवल दुआएं ही नहीं कीं, बल्कि ईरान की व्यावहारिक रूप से सहायता भी की। हालांकि, कुछ मुस्लिम देशों ने इस्लाम का साथ देने के बजाय ईसाइयत और ज़ायूनिज़्म का साथ दिया, जो बेहद अफसोस की बात है।
उन्होंने आगे कहा कि काश! मुसलमान इन वास्तविकताओं को समझ पाते, तो आज उम्मते-मुस्लिमा बुलंदियों पर होती और गुलामी की जिंदगी न गुजार रही होती। यदि मुसलमान गुलामी का जीवन जी रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि वे बातिल के हाथों बिक चुके हैं।
हालांकि अमीर-ए-शरीअत मौलाना फ़ैसल रहमानी इस बैठक में स्वयं उपस्थित नहीं थे, लेकिन वे लगातार इसकी जानकारी लेते रहे।
इस अवसर पर इमारत-ए-शरिया के नाज़िम ने कहा कि हमारी दिली इच्छा है कि आप बार-बार इस संस्थान में तशरीफ लाएं, ताकि यहां एक नया और खुशनुमा माहौल कायम हो सके।
अंत में दुआ के साथ इस बैठक का समापन हुआ।
आपकी टिप्पणी