हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई से ‘कार्यस्थल के वतन होने’ के बारे में सवाल किया गया, जिसका जवाब इस प्रकार है:
प्रश्न: क्या कार्यस्थल का स्थान वतन का हुक्म रखता है?
उत्तर: किसी स्थान पर काम करने से वह स्थान वतन नहीं बन जाता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति उस स्थान पर रहता भी हो और कम से कम एक या दो वर्ष तक वहीं रहने का इरादा रखता हो, तो उस पर मुसाफ़िर का हुक्म लागू नहीं होगा। ऐसी स्थिति में उसकी नमाज़ पूरी होगी और उसका रोज़ा सही होगा।
आपकी टिप्पणी