हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली सिस्तानी से जीवन-यापन के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता पर खुम्स के बारे में सवाल किया गया, जिसका जवाब इस प्रकार है:
सवाल: ऐसा छात्र जिसे उसके पिता या विश्वविद्यालय की ओर से पैसे मिलते हैं, इसी तरह ऐसी गृहिणी जिसे उसका पति खर्च के लिए पैसे देता है और वह उनमें से कुछ बचा लेती है, या ऐसा व्यक्ति जिसके पास कोई नौकरी नहीं है, लेकिन कोई अन्य व्यक्ति उसे पैसे भेजता है, तो क्या इन लोगों पर खुम्स देना अनिवार्य है? जबकि इनका कोई रोज़गार नहीं है।
जवाब: जिस रकम को प्राप्त हुए एक साल बीत चुका हो और वह जीवन-यापन के खर्च में इस्तेमाल न हुई हो, उस पर खुम्स देना वाजिब है।
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