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हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.ल की ज़ायरीन-ए-इमाम हुसैन अ.स.के हक़ में दुआ
हौज़ा / हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) ने एक रिवायत में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) के उस विशेष करम का उल्लेख किया है जो वह इमाम हुसैन (अ.स.) के ज़ायरीन पर करती हैं।
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इमाम हुसैन (अ.) के ज़ायर पर अल्लाह तआला फ़ख़्र करता है
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.) ने एक रिवायत में हज़रत सैय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ.) के ज़ायरीन के अल्लाह तआला के निकट उच्च स्थान की ओर संकेत किया है।
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दिन की हदीस:
हज़रत इमाम हुसैन अ.स.के ज़ायर पर अल्लाह तआला का फ़ख्र
हौज़ा / इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. ने एक रिवायत में हज़रत सैय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन अ.स.के ज़ायरों के अल्लाह तआला के यहाँ उच्च और सम्मानित स्थान की ओर इशारा किया हैं।
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दिन की हदीस:
हज़रत इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन के लिए फ़रिश्तों की दुआ
हौज़ा / हज़रत इमाम इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स.ने एक रिवायत में हज़रत इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन के लिए फ़रिश्तों की दुआके बारे में फरमाया हैं।
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दिन की हदीस
हर इंसान की तमन्ना इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में क़यामत के दिन इमाम हुसैन (अ) के ज़ायरीन के उच्च स्थान और सम्मान का उल्लेख किया है।
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अरबईन-ए-हुसैनी का नैतिक संदेश
कर्बला, जो कि मज़लूमियत का प्रतीक है, इसे केवल इमाम हुसैन (अ) की मज़लूमियत तक सीमित रखना उचित नहीं है, बल्कि कर्बला ईसार, क़ुर्बानी , अख़लाक़ और किरदार, तहज़ीब व तमद्दुनऔर इंसानी क़द्रों का वह कोह-ए-हिमालय है, जिससे टकराकर तूफ़ान-ए-यज़ीदियत स्वतः ही नष्ट और मिट जाता है।
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दिन की हदीस:
इमाम हुसैन अ.स.की ज़ियारत से परेशानियाँ दूर होती हैं
हौज़ा / हज़रत इमाम जफार सादीक अ.स.ने एक रिवायत में इमाम हुसैन अ.स.की ज़ियारत करने के सवाब की ओर इशारा किया हैं।
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दिन की हदीस:
हक़ और बातिल का पैमाना
हौज़ा / हज़रत इमाम मूसा काज़िम अ.स. ने एक रिवायत में सत्य बोलने और असत्य का साथ छोड़ने का वास्तविक पैमाना बताया है।
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दिन की हदीस:
सत्य की कड़वाहट और असत्य की मिठास
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व.ने एक रिवायत में फरमाया, सत्य और असत्य की वास्तविकता तथा सांसारिक इच्छाओं का अनुसरण करने के परिणाम को स्पष्ट किया है।
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दिन की हदीस:
अल्लाह की रहमत और राहत मिलने की उम्मीद
हौज़ा / हज़रत इमाम अली (अ.स.) ने एक रिवायत में मोमिनों को फ़रज का इंतज़ार करने तथा अल्लाह की रहमत से कभी निराश न होने की नसीहत की है।
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दिन की हदीस
ख़ुदा के नज़दीक सबसे पसंदीदा अमल
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में नमाज़ की फ़ज़ीलत और उसे वक़्त पर अदा करने की अहमियत की ओर इशारा फ़रमाया है।
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हक़ के बचाव में डट जाना
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में बातिल के मुक़ाबले में डट जाने और स्थिरता पर ज़ोर दिया है।
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दिन की हदीसः
जिन लोगों का अपना दामन ऐबों से भरा होता है, वही दूसरों की कमियों को फैलाते फिरते हैं
अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में उन लोगों के बारे में बताया है जो दूसरों के ऐबों और कमियों को फैलाते हैं तथा इसके पीछे छिपे कारण को स्पष्ट किया है।
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दिन की हदीसः
बात को आगे बढ़ाने से पहले उस पर विचार करें
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में इस बात पर ज़ोर दिया है कि किसी बात को आगे सुनाने से पहले उसे गहराई से समझना और उस पर विचार करना चाहिए।
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रोज़ी भी इंसान को तलाश करती है
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने अपने पुत्र के नाम लिखे एक पत्र में रोज़ी की वास्तविकता तथा उसे प्राप्त करने के प्रयास में मन की शांति और अल्लाह पर भरोसा रखने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
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दिन की हदीस:
हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत से मोहब्बत
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स.ने एक रिवायत में अपनी शहादत के बारे में,शहादत से मोहब्बत का इजहार किया है
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दिन की हदीसः
सम्मान, शत्रु पर विजय प्राप्त करने में है
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में बताया है कि वास्तविक सम्मान और महानता शत्रु पर विजय प्राप्त करने में है।
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दिन की हदीस:
दुश्मन से बेखबर रहने का अंजाम
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स. ने एक रिवायत में दुश्मन से बेखबर रहने के अंजाम की ओर इशारा किया है।
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जंग के मैदान मे अल्लाह का ज़िक्र
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में योद्धाओं को जंग के मैदान में अल्लाह का अधिक ज़िक्र करने और व्यर्थ की बातों से बचने की सलाह दी है।
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दिन की हदीसः
इस्लाम: प्रेम और मानवता का धर्म, यहाँ तक कि युद्ध के मैदान में भी
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक आदेश-पत्र में युद्ध की स्थिति में भी मानवीय नैतिकता और अधिकारों का पालन करने के सिद्धांत बताए हैं।
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दिन की हदीस
इमाम ज़माना (अ) की ग़ुरबत
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम ने एक रिवायत में हज़रत वली-ए-अस्र (अ) की ग़ुरबत और तन्हाई का उल्लेख किया है।
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जनाज़े में शामिल होने वालों का अज्र और सवाब
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में मोमिन के जनाज़े में शामिल होने वालों के लिए इलाही इनाम को बयान किया है।
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सम्मानपूर्ण मृत्यु, अपमानजनक जीवन से बेहतर है
इमाम हुसैन ने एक हदीस में बताया है कि सम्मान और स्वाभिमान को अपमानपूर्ण जीवन पर प्राथमिकता देनी चाहिए।
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सर्वोच्च भलाई और नेकी
पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में शहादत के महान महत्व का उल्लेख किया है।
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दिन की हदीसः
शहीदों और नबियों के साथ रहने की आरज़ू
अमीरुल मोमेनीन (अ) ने अपने ख़ुत्बे के एक हिस्से में अल्लाह से आख़रत में सबसे ज़्यादा खुशी मांगी है।
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दिन की हदीसः
शहादत, अहल-ए-बैत (अ) के लिए सम्मान और गौरव
इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में शहादत को अहल-ए-बैत (अ) के लिए सम्मान और गौरव बताया है।
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दिन की हदीसः
इमाम हुसैन (अ) के कलाम मे मुनाफिक़ की पहचान
इमाम हुसैन (अ) ने एक रिवायत में बताया है कि पैगंबर मुहम्मद (स) के समय में मुनाफिकों की पहचान क्या थी।
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दिन की हदीसः
अमीरुल मोमेनीन (अ) के कलाम में शहादत का शौक़
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली इब्न अबी तालिब (अ) ने एक रिवायत में शहादत के उच्च स्थान और उसके प्रति अपनी गहरी अभिलाषा का वर्णन किया है।