हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , निम्नलिखित रिवायत को "बिहार उल अनवार " पुस्तक से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
:قال الامام الصادق علیہ السلام
مَنْ سَرَّهُ اَنْ یَکُونَ مِنْ اَصْحابِ الْقائِمِ فَلْیَنْتَظِرْ، وَلْیَعْمَلْ بِالْوَرَعِ وَ مَحاسِنِ الاَْخْلاقِ وَ هُوَ مُنْتَظِرٌ
हज़रत इमाम सादिक़ (अ) ने फरमाया :
यदि कोई व्यक्ति चाहता है कि वह इमाम महदी (अ) के साथियों और अनुयायियों में से हो, तो उसे इमाम के प्रकट होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए, और इस दौरान उसे तकवा अपनानी चाहिए और अच्छे अख्लाक का विकास करना चाहिए।
बिहार उल अनवार, भाग 52, पेज 140
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