अल्लाह का रसूल (91)
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धार्मिकजब अल्लाह जीविका देता है, तो इंसान मज़दूरी क्यों तय करता है?
हौज़ा/तौहीद के नज़रिए से, अल्लाह ही असली देने वाला है और इंसान सिर्फ़ जीविका देने का एक माध्यम है। इंसानों को जीविका देना अल्लाह की मर्ज़ी पर है, उससे अलग और आज़ाद नहीं। इस बात को समझने से इंसान…
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धार्मिकहज़रत यूनुस अलैहिस सलाम कितनी अवधि तक मछली के पेट मे रहे?
हौज़ा / हज़रत यूनुस की कहानी एक ऐसी अध्यात्मिक यात्रा की कहानी है जो अल्लाह के संदेश से आरम्भ होकर एक अचम्भित परिक्षा तक पहुंचती है, जो ईमान, पश्चातप और अल्लाह की हिकमत के गहरे हक़ाइक़ को व्यक्त…
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धार्मिकपैग़म्बर (स) की बेसत का पहला तोहफ़ा
हौज़ा / एक इंसान की ज़िन्दगी का राज़ यही है,कि वह हर वक्त फ़र्ज़ की ओर ध्यान दें, ग़ैबी आवाज़ का इंतेज़ार और नज़र न आने वाले हाकिम, सर्वशक्तिमान, इख़्तियार रखने वाले, वजूद के हुक्म पर ध्यान देना,…
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धार्मिकबच्चों के सवाल | अल्लाह कैसा है?
हौज़ा/ कुछ बच्चे पूछते हैं कि अल्लाह कैसा है और वह कैसा है, लेकिन अल्लाह उन चीज़ों जैसा नहीं है जिन्हें हम देखते हैं; क्योंकि वह सबका बनाने वाला है और अपनी बनाई चीज़ जैसा नहीं हो सकता।
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दिन की हदीसः
धार्मिकपिता की बद-दुआ से सावधान!
हौज़ा / अल्लाह के रसूल (स) ने एक रिवायत में पिता की बद-दुआ के खतरे के बारे में चेतावनी दी है।
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धार्मिकअगर हम ज़िंदगी में इन तीन चीज़ों को ठीक कर लें तो क्या होगा? नहजुल बलाग़ा में इमाम अली (अ) का बयान
हौज़ा/हज़रत इमाम अली (अ) फ़रमाते हैं: अगर तुम अपनी ज़िंदगी में तीन चीज़ें ठीक करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे लिए तीन और चीज़ें ठीक कर देगा।
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दिन की हदीस:
धार्मिकहज़रत फातिमा ज़हेरा स.ल.का नाम "फातिमा" क्यों रखा गया?
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व. ने एक रिवायत में बयान फरमाया है कि अल्लाह ताला हज़रत फातिमा स.ल.की अज़मत की पहचान कर रहा है।
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धार्मिकशरई अहकाम | दूसरों के हक़ लौटाना; कल की कीमत या आज की?
हौज़ा/ आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने कई साल पहले बेची गई संपत्ति के मुआवज़े की राशि की गणना के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस:
धार्मिकअल्लाह तआला के नज़दीक बेहतरीन काम
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व. ने एक रिवायत में अल्लाह तआला के नज़दीक बेहतरीन काम की पहचान कराई है।
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धार्मिकइमाम हसन (अ) की सुल्ह अमन का मुहं बोलता सबूत
हौज़ा / युद्ध और विवाद से घिरे वर्तमान युग में शहज़ादा ए सुल्ह हज़रत इमाम हसन अ.स.की शिक्षाएं पूरी दुनिया के लिए शांति और अमन की गारंटी हैं।
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धार्मिकजानबूझकर तीन जुमा की नमाज़ छोड़ने के गंभीर परिणाम
हौज़ा / पैग़म्बर (स) ने एक चेतावनी भरे वृत्तांत में जुमे की नमाज़ में शामिल होने के महत्व पर ज़ोर दिया है।
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ईरानहलाल रोज़ी बच्चों को हक़ पज़ीर बनाती हैः सययद अली रज़ा तराशीयून
हौज़ा / हरम ए हज़रत फातेमा मासूमा स.ल. में ख़िताब करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सययद अली रज़ा तराशीयून ने कहा कि हराम माल का दाख़िल होना ज़िंदगी को तबाही में मुब्तिला कर देता है, जबकि…
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धार्मिकफ़रात नदी के किनारे इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत की फ़ज़ीलत
हौज़ा / इमाम अली इब्न मूसा अल-रज़ा (अ) ने एक रिवायत बयान की है जो इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत की फ़ज़ीलत की ओर इशारा करती है।
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हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रसूल हक़शनास:
ईरानसमाज की मुक्ति और प्रगति का एकमात्र मार्ग कुरान से जुड़ाव है
हौज़ा / इस्फ़हान के इमाम जुमा ने कहा: कुरान से दूरी जीवन को आध्यात्मिक मृत्यु की ओर ले जाती है, जबकि कुरान के साथ जीवन व्यतीत करना और उसे मार्गदर्शक बनाना सभी की ज़िम्मेदारी है और समाज की आध्यात्मिक…
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हुज्जतुल इस्माइल रमज़ानी:
ईरानजब विश्वास की जगह अल्लाह के अलावा किसी और पर निर्भरता आ जाती है, तो इबादत का संतुलन बिगड़ जाता है
हौज़ा/ माज़ंदरान के इस्लामी प्रचार विभाग के कुरानिक मामलों के विभाग के प्रमुख ने कहा: मार्गदर्शन केवल अल्लाह के हाथ में है और समाज की मुक्ति का मार्ग कुरान और अल्लाह के जीवन की ओर लौटना है।
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धार्मिकआयात ए ज़िंदगी । दुःख और परेशानियों से छुटकारा पाने का रास्ता
हौज़ा / कुछ लोग जब जीवन की मुश्किलों, समस्याओं और दुखों में पड़ते हैं, तो वे खुदा को क़ुसूरवार मानते हैं। और शायद इसी वजह से वे खुदा से दूर हो जाते हैं और अपने धार्मिक फरज़ों को छोड़ देते हैं।
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धार्मिकमुसलमान आपस में इतना मतभेद क्यों रखते हैं?
हौज़ा / मुसलमानों के बीच मतभेद इस्लामी दुनिया की सबसे दुखद वास्तविकताओं में से एक है।
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धार्मिकरमज़ान उल मुबारक के पच्चीसवें दिन की दुआ
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व.ने यह दुआ बयान फ़रमाई हैं।
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धार्मिकरमज़ान उल मुबारक के दसवें दिन की दुआ
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व.ने यह दुआ बयान फ़रमाई हैं।
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धार्मिकरमज़ान उल मुबारक के नौवें दिन की दुआ
हौज़ा / हज़रत रसूल अल्लाह स.ल.व.व.ने यह दुआ बयान फ़रमाई हैं।