हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत नहजुल बलाग़ा कितब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال الامیر المومنین علیه السلام:
إنَّ الفِتَنَ إذا أقبَلَت شَبَّهَت، و إذا أدبَرَت نَبَّهَت، يُشَبِّهنَ مُقبِلاتٍ و يُعرَفنَ مُدبِراتٍ، إنَّ الفِتَنَ تَحومُ كالرِّياحِ يُصِبنَ بَلَدا و يُخطِئنَ اُخرى
हज़रत इमाम अली (अ) फ़रमाते हैः
1- याद रखो दंगे जब आते है तो लोगो को शुबहात मे डाल देते है,
2- जब जाते है तो होशियार कर जाते है। ये आते समय तो पहचाने नही जाते लेकिन जब जाने लगते है तो पहचान लिए जाते है,
3- हवाओ की तरह चक्कर लगाते रहते है, किसी शहर को अपनी ज़द मे ले लेते है तो किसी नज़र अंदाज़ कर देते है।
नहजुल बलागा़, खुत्बा 93
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