हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इमाम ए जुमआ मस्जिद-ए-शीरीन (शिया जामा मस्जिद), खजूरी, दिल्ली का ने कहां,इस्लामाबाद की मस्जिद और इमामबारगाह खदीजतुल कुबरा में जुमे की नमाज़ के दौरान होने वाला कायराना आतंकवादी हमला इंसानियत के माथे पर कलंक है।
अल्लाह के घर में, सजदे और कनूत की हालत में मासूम नमाज़ियों का खून बहाना यह साबित करता है कि इन खूंखार दरिंदों का न तो दीन-ए-इस्लाम से कोई ताल्लुक है और न ही इंसानियत से।हम हिंदुस्तान की सरज़मीन से इस दहला देने वाले हादसे की पुरज़ोर मज़म्मत (कड़ी निंदा) करते हैं।
इस हादसे के दिल दहला देने वाले मंज़र रूह को तड़पा देने वाले हैं। हम सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग करते हैं कि अब सिर्फ लफ्ज़ी ताज़ियत (शब्दों की संवेदना) काफी नहीं है। इन दरिंदा सिफत कातिलों और उनके पीछे छिपे मददगारों को तुरंत बेनकाब करके कानून के कटघरे में लाया जाए।
मस्जिदों और इमामबारगाहों की सुरक्षा के लिए ऐसे ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जाएं कि फिर कभी किसी मां की गोद न उजड़े और न ही कोई मासूम बच्चा यतीमी का दुख झेले।
बारगाह-ए-इलाही में अजीज़ाना दुआ है कि परवरदिगार इस हादसे के तमाम शहीदों को जवार-ए-मासूमीन (अ.स.) में जगह अता फरमाए और उनके दरजात बुलंद करे। ज़ख्मियों को शिफा-ए-कामिला नसीब हो और शोकाकुल परिवारों को यह अज़ीम सदमा बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फरमाए। अल्लाह ताला पूरी दुनिया, खासकर इस क्षेत्र को आतंकवाद, फिरकापरस्ती और फितना व फसाद से महफूज़ रखे। आमीन
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