शनिवार 14 फ़रवरी 2026 - 15:31
वैलेंटाइन डे इलाही दीनों के सरासर खिलाफ और नौजवानों को गुमराह करने की मग़रिबी साज़िश है

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सदरुद्दीन क़ुबांची ने तथाकथित “यौमे-मोहब्बत” (वैलेंटाइन डे, 14 फ़रवरी) के बारे में गुफ़्तगू करते हुए कहा कि यह दिन नौजवानों को गुमराह करने के लिए एक मग़रिबी साज़िश है और ऐसी सोच की पैदावार है जो इलाही अदयान के खिलाफ है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , नजफ़ अशरफ़ के इमाम ए जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सदरुद्दीन क़ुबानची ने हुसैनिया ए आज़म फातिमिया, नजफ़ अशरफ़ में जुमआ के ख़ुत्बे के दौरान माह-ए-मुबारक रमज़ान की आमद के मौक़े पर कहा कि इस महीने में हमें ख़ुदावंद-ए-मुतआल की तरफ़ ज़्यादा रुजू करना चाहिए।

जैसा कि रसूल ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम ने फ़रमाया,यह वह महीना है जिसमें तुम्हें ख़ुदा की मेहमानी की दावत दी गई है और तुम्हें अहल-ए-करामत-ए-इलाही में शुमार किया गया है; इसमें तुम्हारी साँसें तस्बीह हैं, तुम्हारी नींद इबादत है, तुम्हारा अमल क़बूल है और तुम्हारी दुआ मुस्तजाब है।

उन्होंने कहा कि इस महीने से नफ़्स और अख़लाक़ की इस्लाह के लिए फ़ायदा उठाना चाहिए। रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम ने फ़रमाया,जो शख़्स इस महीने में अपने अख़लाक़ को बेहतर बनाता है, उसके लिए उस दिन सिरात से गुज़रने का परवाना होगा जिस दिन क़दम डगमगा जाते हैं।

इमाम-ए-जुमआ नजफ़ अशरफ़ ने ख़ुत्बे के सिलसिले में इराक़ी मीडिया से मुतालबा किया कि वह माह-ए-रमज़ान की हुरमत को महफ़ूज़ रखें, क्योंकि इस महीने की क़द्रों से नौजवानों को मुन्हरिफ़ करने के मंसूबे जारी हैं।उन्होंने एक मफ़रूर बअसी मुसन्निफ़ की जानिब से बनाई गई “हमदिया” नामी सीरियल की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि यह सीरियल गुमराहकुन और फ़ासिद है।

अराकीन ए पार्लियामेंट ने भी इसकी नशरियात रोकने का मुतालबा किया है। हम भी इराक़ी मीडिया से मुतालबा करते हैं कि इस सीरियल की इशाअत रोकी जाए और इसके मुसन्निफ़ व परचार करने वालों के खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाए।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सदरुद्दीन क़ुबानची ने तथाकथित यौम-ए-मोहब्बत (वैलेंटाइन डे, 14 फ़रवरी) के बारे में गुफ़्तगू करते हुए कहा कि यह दिन नौजवानों को गुमराह करने के लिए एक मग़रिबी साज़िश है और इलाही अदयान के मुख़ालिफ़ सोच की पैदावार है।

हक़ीक़त में यह एक मुन्हरिफ़ पादरी की याद मनाने का दिन है जिसे अख़लाक़ी जुर्म की वजह से सज़ा-ए-मौत दी गई थी। हम नौजवानों और ज़राए-ए-इब्लाग़ से मुतालबा करते हैं कि इस फ़ासिद मुनासबत की तर्वीज़ से परहेज़ करें।

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