रविवार 29 मार्च 2026 - 15:39
जंग में उतार-चढ़ाव, लेकिन अंतिम विजय अल्लाह की राह में जिहाद करने वालों की होती है

हौज़ा / मरजा ए तकलीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा जवादी आमोली ने कहा कि जंग में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं कभी मोमिन जीतते हैं तो कभी काफिर लेकिन अंतिम परिणाम हमेशा अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वालों के पक्ष में होती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मरजा ए तकलीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा जवादी आमोली ने कहा कि जंग में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं कभी मोमिन जीतते हैं तो कभी काफिर लेकिन अंतिम परिणाम हमेशा अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वालों के पक्ष में होती है।

मरजा-ए-तकलीद आयतुल्लाह जवादी आमोली ने कुरान की आयत (सूरा आले इमरान: 140) का हवाला देते हुए कहा कि जंग में नुकसान उठाना अल्लाह की तरफ से परीक्षा है, जिसमें दोनों पक्षों को जान-माल का नुकसान होता है, लेकिन मोमिन अल्लाह की रहमतों से बहरमंद होता हैं, जबकि काफिर इससे वंचित रहता हैं। (सूरा निसा: 104)

उन्होंने जोर देकर कहा कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद का दावा करने वाला हमेशा चमत्कार से विजयी नहीं होता। उसे कभी अस्थायी हार और कभी जीत का स्वाद चखना पड़ता है, ताकि उसके अंदर की असली सच्चाई उजागर हो सके।

उन्होंने हज़रत अली अ.स. का उदाहरण देते हुए बताया कि रसूलुल्लाह (स) के साथ जंग में मुजाहिदीन ने अपने पिता, बेटे, भाई और चाचाओं तक को मारा, लेकिन इसका परिणाम उनके ईमान, सब्र और जेहादी जज़्बे में मज़बूती के अलावा कुछ नहीं था।

हालाँकि, कभी उनकी जीत होती, कभी दुश्मन की। आखिरकार अल्लाह ने उनकी सच्चाई को परखा, फिर दुश्मन को ज़लील किया और मोमिनों की जीत का झंडा बुलंद किया।

स्रोत: तस्नीम, जिल्द 19, पेज 534

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