मंगलवार 21 जुलाई 2026 - 17:26
अल्लामा मुहम्मद तकी जाफ़री (र): "मैंने हज़रत अली (अ.) की एक क्षण की ज़ियारत को हज़ार वर्षों के सांसारिक जीवन पर प्राथमिकता दी"

प्रसिद्ध इस्लामी चिंतक, दार्शनिक और क़ुरआन के व्याख्याकार स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तकी जाफ़री (र) ने अपने छात्र जीवन की एक प्रेरणादायक घटना का वर्णन करते हुए कहा कि नजफ़ अशरफ़ में एक विद्वतापूर्ण और मित्रतापूर्ण सभा के दौरान जब उन्होंने हज़रत अली (अ) की एक क्षण की ज़ियारत को संसार की सभी बाहरी सुख-सुविधाओं से अधिक महत्व दिया, तो अल्लाह तआला ने उन्हें एक असाधारण आध्यात्मिक अवस्था में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की ज़ियारत का सौभाग्य प्रदान किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक बार प्रसिद्ध इस्लामी विचारक, दार्शनिक और क़ुरआन के व्याख्याकार स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तकी जाफ़री (र) से पूछा गया कि उन्हें आध्यात्मिक ऊँचाइयाँ किस प्रकार प्राप्त हुईं। इसके उत्तर में उन्होंने नजफ़ अशरफ़ में अपने छात्र जीवन की एक यादगार घटना सुनाई और कहा कि उनके अनुसार अल्लाह तआला ने इसी परीक्षा के बाद उन्हें अपनी विशेष कृपाओं से नवाज़ा।

अल्लामा जाफ़री (र) ने बताया कि वे नजफ़ अशरफ़ के मदरसा-ए-सद्र में रहते थे। उस समय विद्यार्थी ईद और अहले बैत (अ) के विलादत दिवसों पर विशेष सभाएँ आयोजित करते थे और अज़ादारी के दिनों में मजलिसों का आयोजन किया जाता था। हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.) की विलादत की एक रात मगरिब और इशा की नमाज़ के बाद एक सभा चल रही थी, जिसमें आका शैख़ हैदर अली इस्फ़हानी भी मौजूद थे, जो अपनी हाज़िरजवाबी और खुशमिज़ाजी के लिए प्रसिद्ध थे।

सभा के दौरान उन्होंने अख़बार का एक टुकड़ा निकाला, जिस पर एक अत्यंत सुंदर महिला की तस्वीर छपी थी। उसके नीचे लिखा था, "अपने समय की सबसे सुंदर युवती।" फिर उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि यदि उन्हें एक ओर इस महिला से पूरी तरह शरीअत के अनुसार विवाह करके एक हज़ार वर्ष तक सुखपूर्वक जीवन बिताने का अवसर मिले और दूसरी ओर केवल एक बार हज़रत अली (अ) की मुस्तहब ज़ियारत करने का अवसर मिले, तो वे किसे चुनेंगे।

यह प्रश्न बारी-बारी से सभी उपस्थित लोगों से पूछा गया। कुछ ने मज़ाकिया अंदाज़ में उत्तर दिया, किसी ने कहा कि हज़रत अली (अ) की ज़ियारत तो मृत्यु के बाद भी मिल जाएगी, जबकि कुछ ने शरीअत की अनुमति का हवाला देकर सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देने का संकेत दिया। इससे सभा में हँसी का माहौल बन गया।

अल्लामा जाफ़री (र) ने बताया कि जब उनकी बारी आई तो उन्होंने उस तस्वीर को देखने से भी इंकार कर दिया और तुरंत उत्तर दिया, "मैं हज़रत अली (अ) की एक क्षण की ज़ियारत को इस महिला के साथ हज़ारों वर्षों के वैवाहिक जीवन पर प्राथमिकता दूँगा।"

उन्होंने कहा कि जैसे ही ये शब्द उनकी ज़बान से निकले, उन पर एक अजीब आध्यात्मिक अवस्था छा गई। वे स्वयं को संभाल नहीं सके और अपने कमरे में चले गए। वहाँ उन्होंने एक असाधारण आध्यात्मिक दृश्य देखा। उनके अनुसार उन्होंने एक विशाल कक्ष देखा, जिसके अग्रभाग में एक अत्यंत तेजस्वी और नूरानी व्यक्तित्व विराजमान था। उनके चेहरे और गुण वही थे, जिनका वर्णन शिया और सुन्नी दोनों की रिवायतों में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) के बारे में मिलता है।

अल्लामा जाफ़री (र) ने बताया कि उनके पास बैठे एक युवक से उन्होंने पूछा, "ये महान व्यक्तित्व कौन हैं?" उसने उत्तर दिया, "ये स्वयं हज़रत अली (अ) हैं।" इसके बाद वे उस नूरानी दृश्य को देखते रहे और फिर अचानक सामान्य अवस्था में लौट आए।

उन्होंने कहा कि जब वे दोबारा सभा में पहुँचे तो उनके चेहरे का रंग बदला हुआ था। उपस्थित लोगों ने उनकी अवस्था देखकर पूछा कि क्या हुआ है। प्रारंभ में उन्होंने घटना बताने से परहेज़ किया, लेकिन सभी के बहुत आग्रह करने पर उन्होंने पूरी घटना सुना दी। उनकी बात सुनकर सभी लोग अत्यंत प्रभावित हुए और पूरी सभा पर एक आध्यात्मिक वातावरण छा गया।

अल्लामा जाफ़री (र) के अनुसार, मदरसे के प्रबंधक स्वर्गीय सैयद इस्माईल इस्फ़हानी ने आका शैख़ हैदर से कहा, "आइंदा इस प्रकार की परीक्षाएँ मत लिया कीजिए। आपने हम सबको बहुत कठिन परीक्षा में डाल दिया।"

स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तकी जाफ़री (र) कहा करते थे कि यह घटना उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभवों में से एक थी। उनके अनुसार बाद में जो आध्यात्मिक कृपाएँ और अनुकंपाएँ उन्हें प्राप्त हुईं, उनकी नींव इसी ईश्वरीय परीक्षा में उनकी निष्ठा, सच्ची भावना और अहले बैत (अ) से प्रेम पर आधारित थी।

स्रोत: हिकायात व ख़ातिरात-ए-अल्लामा जाफ़री।

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