हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने विश्वास, सत्य के प्रति निष्ठा और अत्याचारियों से बराअत का ऐलान भी है। इसी उद्देश्य के लिए इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.) ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
सफ़वाने जम्माल कहते हैं:
मैंने इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) से इमाम हुसैन (अ.) की ज़ियारत की अनुमति मांगी और निवेदन किया कि इस यात्रा में मुझे कौन-सा अमल करना चाहिए।
इमाम (अ.स.) ने फ़रमाया,इस रास्ते में उन लोगों से बार-बार बराअत का इज़हार करो, जिन्होंने इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत की बुनियाद रखी।
फिर यह दुआ पढ़ने की शिक्षा दी:
اللَّهُمَّ الْعَنْ أَوَّلَ ظَالِمٍ ظَلَمَ حَقَّ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ، وَآخِرَ تَابِعٍ لَهُ عَلَى ذَلِكَ
ऐ अल्लाह! उस पहले ज़ालिम पर लानत फ़रमा जिसने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम और आले मुहम्मद (अ.स.) के अधिकारों पर अत्याचार किया, और उन सभी पर भी लानत फ़रमा जिन्होंने इस अत्याचार में उसका साथ दिया या उसके मार्ग का अनुसरण किया।
स्रोत: मिस्बाह अल-मुतहज्जिद, खंड 2, पृष्ठ 719
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