हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इस्लामी प्रचार संगठन के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम रूहुल्लाह हरीज़ावी ने कहा कि इस वर्ष का अरबईन मार्च विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि इराक में "शहीद नेता" के जनाज़े में भारी जनसमूह की भागीदारी ने इस्लामी उम्मत और उसके नेतृत्व के बीच गहरे संबंध को प्रदर्शित किया।
उन्होंने कहा कि यद्यपि इराक के अनेक लोग उनके अनुयायी नहीं थे, फिर भी उन्होंने अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में भाग लिया।
हरीज़ावी ने कहा कि इस वर्ष अरबईन के दौरान इस्लामी उम्मत की सबसे बड़ी मांग "शहीद नेता के ख़ून का इंसाफ़" है और "लिसारात" (ख़ून का बदला/इंसाफ़) का नारा इस बार एक नया अर्थ लेकर सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि यदि ईरानी श्रद्धालु, चाहे संक्षिप्त समय के लिए ही सही, अरबईन यात्रा में भाग लें और साथ ही ईरान में आयोजित जनसभाओं में भी शामिल हों, तो यह संदेश जाएगा कि ईरान की जनता अत्याचार के शिकार लोगों के समर्थन और उनके ख़ून के इंसाफ़ के लिए खड़ी है तथा दुनिया के ज़ालिमों की नींद हराम कर देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि शहीद नेता की नियाबती ज़ियारत का उद्देश्य उनकी याद को जीवित रखना और इस वर्ष तथा पिछले वर्ष के सभी शहीदों के ख़ून के इंसाफ़ की मांग को जीवित रखना है।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि लोग अरबईन पदयात्रा में सक्रिय भागीदारी और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलें तो वे अपने सामाजिक दायित्व का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकेंगे।
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