हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,ईरान में हज एवं ज़ियारत मामलों में रहबर-ए-मुअज़्ज़म के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद अब्दुल फ़त्ताह नवाब ने कहा कि इस वर्ष का अरबईन इस्लामी उम्मत की अपने शहीद नेता और रहबर के प्रति वफादारी का एक महान प्रतीक बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि ईरान, नजफ़, कर्बला और अरबईन पदयात्रा के दौरान लोगों ने पूरे उत्साह के साथ अज़ादारी, अलम और परचम के जुलूसों तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर शहीद नेता की याद को जीवित रखा।
इराक़ यात्रा के समापन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहली बार अरबईन शहीद रहबर की भौतिक उपस्थिति के बिना मनाया गया, लेकिन उनकी विचारधारा, मार्गदर्शन और शिक्षाएँ हर स्थान पर स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। ज़ायरीन ने उनकी नियाबत में ज़ियारत अदा की और विभिन्न सभाओं में उनके व्यक्तित्व, नैतिकता और नेतृत्व को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि दुश्मन शहीद रहबर के नाम और संदेश को भुला देना चाहता था, लेकिन इस वर्ष इराक़ में उनका नाम, उनका संदेश और उनकी स्मृति पहले से अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आई। उन्होंने यह भी कहा कि तथाकथित ज़ायोनी शासन को वैश्विक स्तर पर वैधता दिलाने की कोशिशें असफल रहीं, जबकि लाखों ज़ायरीन के हाथों में फ़िलिस्तीन का झंडा लहराता दिखाई दिया।
सैयद अब्दुल फ़त्ताह नवाब ने कहा कि रहबर-ए-इंक़िलाब के निर्देश के अनुसार शहीद नेता और अन्य शहीदों की नियाबत में ज़ियारत अदा की गई, जिसे ज़ायरीन ने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ संपन्न किया।
उन्होंने इराक़ी जनता की मेहमाननवाज़ी और सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शहीद रहबर के अंतिम संस्कार से लेकर अरबईन के ज़ायरीन की सेवा तक एक अनुकरणीय भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इराक़ी जनता ने शहीद नेता को पूरी इस्लामी उम्मत का रहबर और दुनिया के स्वतंत्र लोगों का प्रिय व्यक्तित्व मानकर मुस्लिम उम्मत की एकता और विलायत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का व्यावहारिक प्रमाण प्रस्तुत किया।
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