बुधवार 29 जुलाई 2026 - 16:41
सुप्रीम लीडर की शहादत ने मुस्लिम समुदाय में नई जागरूकता की लहर पैदा की।आयतुल्लाह रजब़ी

आयतुल्लाह महमूद रजब़ी ने कहा कि शहीद सुप्रीम लीडर अपने पूरे जीवन, संघर्ष, निष्ठा और विशेष रूप से अपनी शहादत के माध्यम से न केवल इस्लामी समाज बल्कि दुनिया की अनेक क़ौमों को भी इस्लामी मूल्यों और इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हौज़ा ए इल्मिया से जुड़े मुद्दों पर उनकी गहरी समझ और मार्गदर्शन हमेशा याद रखा जाएगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,आयतुल्लाह महमूद रजब़ी ने कहा कि रहबर शहीद ने अपने पूरे जीवन, संघर्ष, निष्ठा और विशेष रूप से अपनी शहादत के माध्यम से न केवल इस्लामी समाज बल्कि दुनिया की अनेक क़ौमों को भी इस्लामी मूल्यों और इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हौज़ा ए इल्मिया से जुड़े मुद्दों पर उनकी गहरी समझ और मार्गदर्शन हमेशा याद रखा जाएगा।

क़ुम में रहबर शहीद की शहादत और उसके वैश्विक सामाजिक प्रभाव विषय पर आयोजित एक वैज्ञानिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आयतुल्लाह रजब़ी ने कहा कि ईश्वरीय पैग़म्बरों का मूल दायित्व इंसान की बुद्धि और उसकी फ़ितरत को जागृत करना था, और रहबर शहीद ने भी अपने चरित्र, विचारों और शहादत के माध्यम से इसी महान मिशन को आगे बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि उनकी शहादत के बाद उत्पन्न हुई जागरूकता की लहर ईरान की सीमाओं से आगे बढ़कर अन्य इस्लामी और स्वतंत्र राष्ट्रों तक भी पहुँची।

उन्होंने कहा कि दुश्मन वर्षों से सांस्कृतिक और वैचारिक आक्रमण के ज़रिए इस्लामी समाजों की पहचान को कमज़ोर करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन रहबर शहीद ने "सांस्कृतिक आक्रमण", "संज्ञानात्मक युद्ध" और "जिहाद-ए-तबयीन" जैसे विषयों पर समय रहते मार्गदर्शन देकर इन षड्यंत्रों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयतुल्लाह रजब़ी ने कहा कि रहबर शहीद को हौज़ा-ए-इल्मिया की आवश्यकताओं, क्षमताओं, चुनौतियों और भविष्य की ज़रूरतों का असाधारण ज्ञान था।

उन्होंने विभिन्न अवसरों पर हौज़ों के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए, जिनसे आज भी भरपूर लाभ उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने आगे कहा कि रहबर शहीद का सादा, कर्मशील और प्रतिरोधी जीवन उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए एक व्यावहारिक आदर्श है। उनकी शहादत ने इस्लामी समाजों में एकता, जागरूकता और धार्मिक मूल्यों के पुनर्जागरण को नई शक्ति प्रदान की तथा विरोधियों की अनेक योजनाओं को विफल किया।

अंत में आयतुल्लाह रजब़ी ने ज़ोर देकर कहा कि उम्मत-ए-मुस्लिमा को रहबर शहीद के व्यक्तित्व, विचार और मार्गदर्शन की गहरी समझ हासिल करनी चाहिए, क्योंकि यही जागरूकता समुदाय को फ़ितनों और गुमराही से सुरक्षित रखते हुए सत्य के मार्ग पर दृढ़ बनाए रख सकती है।

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