रविवार 9 अगस्त 2026 - 07:07
पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया की जिम्मेदारी, निष्पक्ष आलोचना और समाज की सुरक्षा..!!

पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े लोगों को ज्ञान, दूरदर्शिता और सही निर्णय लेने की क्षमता के साथ जनता को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। मीडिया को जनता की राजनीतिक समझ और जागरूकता बढ़ाने, अफवाह फैलाने और झूठे आरोप लगाने का मुकाबला करने, निष्पक्ष आलोचना को स्वीकार करने, अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उपयोग करने और अन्याय से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारिता दिवस के अवसर पर इमाम-ए-शहीद, सैय्यदुश्शोहदा और इस्लामी गणराज्य ईरान के मीडिया तथा पत्रकारों के महत्व के संबंध में दिए गए बयानों के चुनिंदा अंश प्रस्तुत हैं:

प्रिंट मीडिया की राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने और साजिशों का मुकाबला करने में भूमिका

प्रिंट मीडिया से जुड़े लोगों को जीवन की सामान्य समस्याओं और सामाजिक बदलावों के संबंध में दूसरों की तुलना में अधिक ज्ञान, दूरदर्शिता, स्पष्ट सोच और सही निर्णय लेने की क्षमता रखनी चाहिए। इसी आधार पर उनकी जिम्मेदारी है कि वे देश और समाज की जनता को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।

जनता में राजनीतिक समझ और जागरूकता, विश्लेषण करने की क्षमता तथा राजनीतिक रुझानों और उनके उद्देश्यों की पहचान को बढ़ावा देना समाचार संस्थानों की साजिशों और उनकी चालों का मुकाबला करने के लिए आवश्यक है।

आज की दुनिया में पत्रकारिता से जुड़े लोगों को जनता में राजनीतिक जागरूकता पैदा करने, राजनीतिक सोच को बढ़ावा देने और राजनीति के प्रति जनता की गंभीरता तथा रुचि बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक रूप से जागरूक समाज कम असुरक्षित होता है।

जनता में राजनीतिक समझ, विश्लेषण और राजनीतिक लहरों, रुझानों तथा उनके उद्देश्यों को पहचानने की क्षमता बढ़ाना बड़े समाचार संस्थानों की साजिशों और उनकी चालों का मुकाबला करने के लिए अनिवार्य है और इसके लिए मुद्रित मीडिया को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी।

पत्रकारिता के क्षेत्र में वे तत्व जो मुद्रित मीडिया की निश्चित और अविभाज्य जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करते, वे पत्रकारिता में अन्याय और नैतिक विचलन के दोषी होते हैं। (13/02/1375)

पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया की जिम्मेदारी और समाज की सुरक्षा

आज स्वतंत्रता के साथ मुद्रित मीडिया की जो वास्तविक जिम्मेदारी सामने आती है, उसका अर्थ यह है कि पत्रकारिता का एक लक्ष्य और उद्देश्य है और इस उद्देश्य तक पहुंचने के लिए एक साधन की आवश्यकता है, जिसका नाम “स्वतंत्रता” है।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता को मुद्रित मीडिया की जिम्मेदारियों को पूरा करने का साधन होना चाहिए, न कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी को बेलगाम और हर दिशा में मिलने वाली स्वतंत्रता के नाम पर खत्म कर दिया जाए। यही वह चीज है जिसे हासिल करने के लिए पश्चिमी और पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित योजनाकार और उनके सहयोगी आज सीमाओं के उस पार भी खुले तौर पर प्रयास कर रहे हैं और वास्तव में उन्होंने अब खुलकर अपना मोर्चा खोल दिया है। (09/08/1375)

हमें समाज के वातावरण को भाईचारे, प्रेम और अच्छे विचारों वाला वातावरण बनाना चाहिए। मैं हरगिज इस बात का समर्थक नहीं हूं कि समाज में संदेह और बदगुमानी का माहौल पैदा किया जाए।

हमें इन आदतों को अपने अंदर से खत्म करना होगा। अफसोस की बात है कि यह एक चलन बन गया है कि अखबार, मीडिया और विभिन्न संचार माध्यम, जो दिन-ब-दिन अधिक व्यापक और जटिल होते जा रहे हैं, एक-दूसरे पर आरोप लगाने का तरीका अपना रहे हैं। यह अच्छी बात नहीं है। इससे हमारे दिल अंधकारमय और हमारे जीवन का वातावरण भी अंधकार से भर जाता है।

हम लगातार जिम्मेदार लोगों और जनता दोनों से यह कहते हैं कि वे खुद को गैर-जरूरी और गौण मुद्दों में व्यस्त न रखें। इसी कारण मुद्रित मीडिया, संचार माध्यमों, अखबारों और आज के दौर में प्रचलित इंटरनेट तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से बार-बार आग्रह किया जाता है कि ऐसी गलत और अनुचित बातों तथा सामग्रियों को जनता के मानसिक वातावरण में प्रवेश कराने से बचें, जो लोगों के मन को अनावश्यक रूप से व्यस्त कर दें।

अफवाह फैलाने और झूठे आरोप लगाने से बचना; जनता के विश्वास की रक्षा

कुछ लोग, चाहे वे पत्रकारिता से जुड़े हों या विभिन्न अन्य क्षेत्रों से, किसी सलाह को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते। वे हमसे सलाह नहीं मांगते। पता नहीं कुछ संस्थानों, मुद्रित मीडिया और संचार माध्यमों की नीतियां कौन और कहां तय करता है। कुछ लोगों का हित ही मतभेद पैदा करने में है।

लेकिन जो लोग देश के हित चाहते हैं और चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए, उनसे मेरी अपील है कि वे छोटे और गैर-सैद्धांतिक मतभेदों को नजरअंदाज करें।

अफवाह फैलाना और अफवाहों को आगे बढ़ाना सही नहीं है। इंसान देखता है कि कुछ लोग खुले तौर पर देश के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर आरोप लगाते हैं और उनके खिलाफ अफवाहें फैलाते हैं, जो देश की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। इस मामले में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे राष्ट्रपति हों, संसद के अध्यक्ष हों, मजलिस-ए-तश्खीस-ए-मसलहत-ए-निज़ाम के अध्यक्ष हों या न्यायपालिका के प्रमुख हों; ये सभी देश के जिम्मेदार अधिकारी हैं। (19/10/1391)

देश के जिम्मेदार लोग वे व्यक्ति हैं जिन्हें किसी मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनता को उन पर विश्वास और अच्छा विचार रखना चाहिए। अफवाहें नहीं फैलानी चाहिए। दुश्मन यही चाहता है कि अफवाहों के माध्यम से लोगों को एक-दूसरे और देश के जिम्मेदार अधिकारियों के बारे में बदगुमान किया जाए।

अपराधियों और आरोपियों की गरिमा की रक्षा तथा उनके परिवारों की प्रतिष्ठा

अगर यह मान लिया जाए कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है, अदालत में उसका अपराध भी साबित हो गया है और उसे सजा भी सुना दी गई है, यहां तक कि वह जेल भी चला गया है, तो आखिर यह आवश्यकता क्यों है कि हम अखबारों में उसका नाम प्रकाशित करें, ताकि उसका बच्चा, जो स्कूल जाता है, शर्मिंदगी के कारण स्कूल जाने की स्थिति में न रहे?

क्या यह बेहतर नहीं है कि वह अपनी सजा पूरी करे, जेल से बाहर आए और वह तथा उसका परिवार अपनी सामान्य जिंदगी जारी रखें? उसने अपराध किया, उसे सजा मिल गई और मामला खत्म हो गया। क्या उसकी और अधिक बदनामी करना भी जरूरी है? यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु है।

इस संबोधन का उद्देश्य केवल न्यायपालिका नहीं है; न्यायपालिका के जिम्मेदार अधिकारी, न्यायपालिका से बाहर के जिम्मेदार लोग और मीडिया भी इसके संबोधित पक्ष हैं।

एक ओर न्यायपालिका के कामकाज को बेवजह निशाना नहीं बनाना चाहिए कि न्यायपालिका जो भी कदम उठाए, उसके पीछे किसी साजिश या स्वार्थ को तलाश किया जाए। दूसरी ओर केवल किसी व्यक्ति पर आरोप लगने के आधार पर उस आरोप को सार्वजनिक, स्पष्ट और जनमत का विषय भी नहीं बनाना चाहिए।

आखिर जनता को इस बात से क्या लाभ मिलेगा कि अमुक व्यक्ति पर किसी गैर-कानूनी कार्य का आरोप है? इस पहलू पर अवश्य ध्यान देना चाहिए। (06/04/1390)

आलोचना सुनने में उदारता और रचनात्मक तथा विनाशकारी आलोचना में अंतर

आलोचना सुनने के लिए उदार हृदय, खुला दिमाग और सुनने वाले कान होने चाहिए। अगर कोई आपकी आलोचना करे तो इसमें कोई नुकसान नहीं है। हालांकि जो आलोचनाएं की जाती हैं, वे सभी एक जैसी नहीं होतीं।

कुछ आलोचनाएं सुधार के उद्देश्य से नहीं, बल्कि विनाश के लिए की जाती हैं। हम इसे देख रहे हैं; अपने ही मीडिया से जुड़े क्षेत्रों में भी और उनके समर्थक तत्वों में भी। दर्जनों विदेशी रेडियो, टेलीविजन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ऐसे विचारों और धारणाओं को प्रस्तुत करते हैं, जिनकी बुनियाद विनाश और अशांति पर आधारित है। उनका उद्देश्य सुधार नहीं होता। वे जो कुछ प्रसारित और बयान करते हैं, वह विनाश के उद्देश्य से करते हैं। इसी कारण उनमें सच्चाई, असत्य, वास्तविकता के विरुद्ध बातें और निराधार बातें सब कुछ शामिल होता है। कभी किसी छोटी-सी बात को बहुत बड़ा बनाकर पेश किया जाता है और कभी ऐसी बात को, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं होता, एक स्थापित सत्य के रूप में पेश कर दिया जाता है। यह विनाशकारी रवैया है।

लेकिन इन सबके साथ-साथ आलोचना भी मौजूद है; ऐसी आलोचना जो सुधार और सद्भावना पर आधारित होती है। कभी यह आलोचना आपके दोस्तों की ओर से होती है और कभी ऐसे लोगों की ओर से भी होती है जो न आपके दोस्त हैं और न आपके समर्थक। लेकिन वे आपके दुश्मन भी नहीं हैं और उनकी दुश्मनी भी साबित नहीं हुई है। वे केवल आलोचना कर रहे हैं।

इंसान को ऐसी आलोचना भी सुननी चाहिए। संभव है कि इन आलोचनाओं के बीच कोई ऐसी बात मौजूद हो, जो हमारे लिए उपयोगी हो। बहरहाल, इस मामले में उदारता और खुले विचारों से काम लेना चाहिए। (16/06/1388)

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