हौज़ा न्यूज एजेंसी के अनुसार, शिया इस्लामी सर्वोच्च परिषद के उपाध्यक्ष शेख अली अल खतीब ने कहा कि आगामी चरण का सामना करने के लिए आपसी समझ विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए लेबनानी समाज और राजनीतिक दलों, विशेष रूप से प्रतिरोध के साथ बातचीत शुरू की जानी चाहिए।
उन्होंने सभी लेबनानियों से अपील की कि वे मौजूदा परिस्थितियों में विवेक और समझदारी से काम लें तथा आंतरिक फितने को रोकने का प्रयास करें, क्योंकि वर्तमान समय में हमें इससे इज़राइली दुश्मन से भी अधिक भय है।
उन्होंने सीरिया को निशाना बनाए जाने के प्रति भी चेतावनी दी और कहा कि हम सीरिया के बारे में चिंतित हैं, उससे भयभीत नहीं। जिस तरह हम लेबनान के प्रति संवेदनशील हैं, उसी तरह सीरिया के प्रति भी चिंतित हैं। उन्होंने दमिश्क के साथ संबंधों का नया अध्याय खोलने के आह्वान का समर्थन किया।
अरबईन इमाम हुसैनؑ के आंदोलन को पुनर्जीवित करने का अवसर है
शेख अल-खतीब ने कर्बला में इमाम हुसैनؑ की शहादत की अरबईन और इस अवसर पर हर वर्ष इराक में होने वाले करोड़ों लोगों के विशाल जमावड़े का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक शिया धार्मिक अवसर नहीं है, बल्कि इमाम हुसैन के उस आंदोलन को पुनर्जीवित करने का अवसर है, जिसका उद्देश्य उम्मत मे सुधार और उस भ्रष्टाचार का मुकाबला करना था जिसने उम्मत के शरीर को खोखला कर दिया था।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैनؑ का आंदोलन बनी उमय्या से सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं था, बल्कि सुधार के लिए था। इसी कारण इमामों ने आशूरा के आंदोलन को जीवित रखा, ताकि उसके उद्देश्य उम्मत की चेतना में हमेशा कायम रहें। इसी दृष्टिकोण से कर्बला में अरबईन का आयोजन किया जाता है।
उनके अनुसार, आज पश्चिम अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उम्मत की भूमिका को निष्क्रिय करने का प्रयास कर रहा है।
इज़राइली शासन के साथ वार्ता विफल
लेबनान और क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए शेख अल-खतीब ने कहा कि लेबनानी सत्ता और इज़राइली शासन के बीच वार्ता का दौर अपेक्षा के अनुसार बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गया।
उन्होंने कहा कि इज़राइल लेबनानी क्षेत्रों से किसी भी प्रकार की वापसी से इनकार करने की अपनी स्थिति पर कायम रहा। वहीं लेबनानी सत्ता अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए निर्भर थी, लेकिन अमेरिका ने इज़राइल पर प्रभाव डालने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से लेबनान इस वार्ता से खाली हाथ निकला, क्योंकि अमेरिका स्वयं लेबनान के रास्ते को क्षेत्रीय संकट से जोड़ रहा है और लेबनान को इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
आने वाले घटनाक्रमों के प्रति चेतावनी
शेख अल-खतीब ने कहा कि लेबनान की स्थिति क्षेत्र में होने वाली घटनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है और दोनों के बीच संबंध अब स्पष्ट हो चुका है। उन्होंने आने वाले महीनों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आगामी चरण बेहद संवेदनशील है और दुश्मन बिना सोचे-समझे कदम उठा सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के संबंध में अमेरिका की विफलताएं अमेरिकी सरकार को खतरनाक और अविवेकपूर्ण कदमों की ओर धकेल सकती हैं। दूसरी ओर, इज़राइली सरकार स्थिति को और तनावपूर्ण बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, ताकि इज़राइल में चुनावों के संबंध में सर्वेक्षणों द्वारा जताई जा रही संभावित राजनीतिक परिस्थितियों से बचा जा सके।
उन्होंने सभी लेबनानियों से एक बार फिर विवेक और संयम अपनाने तथा आंतरिक तनाव और उकसावे से बचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी लेबनानी सत्ता पर है। उसे अपने असफल विकल्पों की समीक्षा करनी चाहिए और लेबनानियों के बीच, विशेष रूप से प्रतिरोध के साथ संवाद के दरवाज़े खोलने चाहिए। उनके अनुसार, आगामी चरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए लेबनानियों की एकता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।
क्षेत्रीय सुरक्षा कवच बनाने की अपील
शेख अल-खतीब ने क्षेत्रीय स्तर पर अरब और इस्लामी देशों से एक राजनीतिक एवं सुरक्षा-आधारित प्रतिरोधक ढांचा बनाने की अपील की।
उन्होंने विशेष रूप से सऊदी अऱब, मिस्र, तुर्की और सीरिया से इज़राइली उद्देश्यों का सामना करने के लिए एक संयुक्त राजनीतिक और सुरक्षा कवच बनाने तथा इस संबंध में ईरान के साथ समन्वय करने का आह्वान किया।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी देश को दूसरे देश को कमजोर करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सीरिया की स्थिति पर भी चिंता जताई और दक्षिणी सीरिया में इज़राइली कब्जे को इस चिंता का प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने सीरिया में होने वाले विस्फोटों की कड़ी निंदा की और कहा कि जिस तरह लेबनान की चिंता है, उसी तरह सीरिया की भी चिंता है।
उन्होंने लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी और हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम क़ासिम द्वारा उचित समय पर सीरियाई सरकार के साथ संबंधों का नया अध्याय खोलने के आह्वान का समर्थन किया।
एकता के संबंध में सिद्धांतात्मक रुख
शेख अल-खतीब ने कहा कि उनका रुख उम्मत के प्रति लगाव और उसके सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को अल्पसंख्यक नहीं मानते और इस पहचान को स्वीकार नहीं करते।
उन्होंने कहा कि अतीत में भी उन्होंने अलगाववाद और एकांतवाद को अस्वीकार किया था और वर्तमान तथा भविष्य में भी इसे अस्वीकार करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण उन्हें हज़रत अली इब्न अबि तालिब और अहले बैत की शिक्षाओं से मिला है, जिनके लिए उम्मत एक केंद्रीय अवधारणा थी और जिन्होंने इसके लिए अपने प्राण और संपत्ति तक कुर्बान कर दी।
उन्होंने हज़रत अलीؑ के कथन को उद्धृत किया:
“जब तक मुसलमानों के मामले सुरक्षित और व्यवस्थित रहेंगे, मैं उनके साथ शांति बनाए रखूँगा।”
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार इमाम हुसैनؑ ने भी रसूलुल्लाह (स) की उम्मत में सुधार के उद्देश्य से अपनी जान कुर्बान की।
लेबनानी सरकार के प्रदर्शन की आलोचना
शेख अल-खतीब ने दक्षिणी लेबनान के शहरों और कस्बों में इज़राइली दुश्मन द्वारा की जा रही योजनाबद्ध तबाही के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की संदिग्ध चुप्पी पर आश्चर्य और नाराज़गी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि वे इस लगातार जारी अपराध के प्रति लेबनानी सत्ता के रवैये की निंदा करते हैं, क्योंकि लेबनानी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी निष्क्रिय कूटनीति को सक्रिय करके इस विनाश और रक्तपात को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही।
उन्होंने अंत में कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को चीन के राजदूत के साथ उठाया है और अन्य देशों के राजदूतों के साथ भी इस दिशा में प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने ईश्वर से अपनी कोशिशों में सफलता की प्रार्थना करते हुए कहा कि शायद इन प्रयासों के माध्यम से इज़राइली आक्रमणकारी और उसके समर्थकों को इस विनाशकारी कार्रवाई को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके।
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