हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मियरशाइमर ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप कभी हार स्वीकार नहीं करते और हमेशा जीत का दावा करते हैं, जबकि उनके लिए वास्तविकता का कोई विशेष महत्व नहीं है।
उन्होंने कहा कि ट्रंप और अमेरिका दोनों अच्छी तरह जानते हैं कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित नहीं करते। उनके अनुसार, इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर ईरान का प्रभाव और नियंत्रण है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने या उस पर नियंत्रण हासिल करने के लिए वॉशिंगटन की कई महीनों की कथित असफल कोशिशों की ओर इशारा करते हुए मियरशाइमर ने कहा कि ट्रंप ईरान के साथ युद्ध को संभालने में अपनी विफलता से बेहद निराश हैं।
मियरशाइमर के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस्लामाबाद समझौते से कथित तौर पर जल्दबाजी में पीछे हटकर उसे इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया और अब ईरान की नई मांगों के सामने उसके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है।
अमेरिकी विश्लेषक ने ट्रंप सरकार के चार कथित असफल उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ईरान की परमाणु संवर्धन गतिविधियों को रोकने, उसकी मिसाइल क्षमता सीमित करने, प्रतिरोधी मोर्चे के लिए ईरान के समर्थन को कमज़ोर करने और ईरानी शासन में बदलाव लाने में सफल नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दा व्यावहारिक रूप से एजेंडे से बाहर हो चुका है, जबकि ईरान के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की प्रेरणा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। हालांकि, इस्लामी गणराज्य ईरान बार-बार स्पष्ट कर चुका है कि परमाणु हथियार उसकी रक्षा नीति का हिस्सा नहीं हैं।
मियरशाइमर ने अमेरिका की हस्तक्षेपवादी नीतियों को एक भ्रम करार देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों का ढांचा व्यावहारिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वॉशिंगटन के क्षेत्रीय गठबंधनों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने आगे कहा कि इन संघर्षों ने न केवल दुनिया पर भारी आर्थिक बोझ डाला है, बल्कि यह भी साबित किया है कि दूसरे देशों में अमेरिका की सामाजिक इंजीनियरिंग की नीति मूल रूप से एक विनाशकारी विफलता रही है।
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