हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली की इमामबारगाह नूर-ए-इलाही में जश्न-ए-मिलाद के खुशी भरे दिनों के अवसर पर जश्न-ए-सादिक़ैन के शीर्षक से एक रूहानी और इल्मी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रमुख उलेमा, शायरों, मद्दाहों और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के चाहने वालों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान सीरत-ए-रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम, इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के फ़ज़ाइल और शिक्षाओं, मारिफ़त-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम तथा आइम्मा-ए-मासूमीन अलैहिमुस्सलाम की इल्मी और रूहानी सेवाओं पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम की शुरुआत मकतब-ए-इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम, नूर-ए-इलाही के छात्र आज़म सलमा ने तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-करीम से की। इसके बाद कार्यक्रम के संचालन की ज़िम्मेदारी मौलाना मुहम्मद हसन सरसवी ने बखूबी निभाई।
इस अवसर पर स्थानीय शायरों और मद्दाहों ने बारगाह-ए-रसालत और बारगाह-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम में अपने सुंदर कलाम और नज़राना-ए-अक़ीदत पेश किए। इनमें जनाब मिर्ज़ा फ़ज्र साहब सांखनवी, मुहम्मद मेहदी सांखनवी, मुशर्रफ़ सांखनवी, नदीम नक़वी, सागर कर्बलाई और रज़ा अब्बास शामिल थे। उनके अक़ीदत से भरे कलाम ने कार्यक्रम के रूहानी वातावरण को और अधिक नूरानी और प्रभावशाली बना दिया।
जश्न-ए-सादिक़ैन में दिल्ली के प्रमुख उलेमा-ए-किराम ने भी भाग लिया और कार्यक्रम को इल्मी एवं रूहानी गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना सैयद मुहम्मद बाक़िर ज़ैदी ने की। अन्य सहभागी उलेमा में मौलाना आबिद रज़ा, मौलाना रिज़वान हुसैन, मौलाना मुहम्मद रज़ा ज़ैदी, मौलाना शाह मुहम्मद ज़ैदी, मौलाना अली समर ज़ैदी, मौलाना मुक्तदा रिज़वी, मौलाना सज्जाद रब्बानी, मौलाना रियाज़ हैदर, मौलाना तफ़ाख़ुर साहब, मौलाना मुहम्मद अब्बास साबरी, मौलाना नेमत अली और हाफ़िज़ मुहम्मद रज़ा रिज़वी शामिल थे।
अपने ज्ञानवर्धक संबोधन में मौलाना सैयद मुहम्मद बाक़िर ज़ैदी ने सीरत-ए-रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम, इल्म, मारिफ़त और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की पाकीज़ा सीरत पूरी मानवता के लिए एक संपूर्ण आदर्श है। पैग़म्बर-ए-इस्लाम ने ज्ञान, नैतिकता, न्याय, दया और मानवता की ऐसी बुनियादें स्थापित कीं, जिनकी रोशनी आज भी पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रही है।
उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की इल्मी, वैचारिक और रूहानी सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम सादिक़ ने एक ऐसे इल्मी मकतब की बुनियाद को मज़बूत किया, जिसने इस्लामी ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उम्मत का मार्गदर्शन किया। आपकी शिक्षाओं में तौहीद, मारिफ़त-ए-इलाही, नैतिकता, इबादत, ज्ञान और इंसान की व्यावहारिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बुनियादी महत्व प्राप्त है।
अपने संबोधन में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि आइम्मा-ए-मासूमीन अलैहिमुस्सलाम ने रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की वास्तविक शिक्षाओं को सुरक्षित रखते हुए हर दौर में इंसानों की वैचारिक और रूहानी मार्गदर्शन किया। अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की मारिफ़त केवल प्रेम और अक़ीदत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सीरत, चरित्र और शिक्षाओं को अपनी व्यावहारिक ज़िंदगी में अपनाना भी मारिफ़त की एक महत्वपूर्ण अपेक्षा है।
कार्यक्रम के समापन पर मौलाना सैयद मुहम्मद बाक़िर ज़ैदी ने दुआ की और जश्न-ए-सादिक़ैन की इस रूहानी एवं इल्मी महफ़िल को अगले वर्ष तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की गई।

अंत में नूर-ए-इलाही के इमाम-ए-जमाअत मौलाना हैदर अली जाफ़री ने सभी अतिथि उलेमा, शायरों, मद्दाहों और मोमिनीन का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने विशेष रूप से तंजीम जाफ़री कमेटी का भी आभार व्यक्त किया, जिसके सहयोग और बेहतरीन समन्वय के कारण कार्यक्रम की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संपन्न हुईं।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने उम्मीद जताई कि जश्न-ए-सादिक़ैन जैसी इल्मी और रूहानी महफ़िलें नई पीढ़ी को सीरत-ए-रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम, मारिफ़त-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम और विशेष रूप से इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के इल्मी एवं नैतिक मकतब से और अधिक निकट करने में प्रभावी भूमिका निभाएंगी।
आपकी टिप्पणी