हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रमुख धार्मिक विद्वानों ने कुरआन और अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं की रोशनी में शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण और अच्छे चरित्र के निर्माण के महत्व को उजागर किया।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के बौद्धिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास के लिए मजबूत शैक्षिक आधार तैयार करना बहुत जरूरी है।
अंजुमन-ए-शरई शियान जम्मू-कश्मीर के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम सैयद मुजतबा अब्बास मुसवी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान दौर की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए युवा पीढ़ी को धार्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों और आधुनिक वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक शिक्षा से लैस करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
हुज्जतुल इस्लाम सय्यद मुजतबा अब्बास ने कहा कि मकतब बच्चों की बौद्धिक, नैतिक और धार्मिक शिक्षा के बुनियादी केंद्र हैं। इसलिए बदलते हालात और सामाजिक जरूरतों के अनुसार मकतबों की व्यवस्था को और मजबूत करके उसे आधुनिक तरीके से विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने मकतबों में गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को लागू करने पर जोर दिया, ताकि बच्चों को कुरआन, इस्लामी मान्यताओं, धार्मिक आदेशों, पैगंबर की सीरत और अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं की सही जानकारी देने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने तथा व्यावहारिक और व्यावसायिक क्षमताएं विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा सके।
आधुनिक शिक्षा के महत्व को उजागर करते हुए मौलाना सैयद मुजतबा अब्बास ने कहा कि समाज को डॉक्टरों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है। हालांकि, व्यावसायिक योग्यता के साथ मजबूत चरित्र, नैतिक मूल्यों और धार्मिक चेतना का होना भी जरूरी है।

उन्होंने माता-पिता, धार्मिक विद्वानों, शिक्षकों और समाज के संपन्न लोगों से अपील की कि वे मकतबों और धार्मिक शिक्षण संस्थानों के विकास को अपनी सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी समझें और बच्चों तथा युवाओं की धार्मिक, शैक्षिक और नैतिक शिक्षा से जुड़े कार्यों में लगातार सहयोग करते रहें।
जामेआ बाबुल इल्म सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों की सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और कौशल के विकास से जोड़कर युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास, योग्यता और जिम्मेदारी की भावना के साथ सामना करने के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों से कहा कि वे शिक्षा को केवल एक पेशा न समझें, बल्कि इसे सेवा, मार्गदर्शन और चरित्र निर्माण का पवित्र दायित्व मानें।
उन्होंने कहा कि ज्ञान और जागरूकता से संपन्न, अनुशासन का पालन करने वाली और नैतिक जिम्मेदारियों की भावना रखने वाली पीढ़ी के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास, एक-दूसरे का सम्मान और एकता जरूरी है। इससे युवा पीढ़ी अपनी धार्मिक और नैतिक पहचान से जुड़े रहते हुए समाज के निर्माण और विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।
सम्मेलन को संबोधित करने वाले अन्य धार्मिक विद्वानों में हुज्जतुल इस्लाम सैयद मुहम्मद हुसैन मुसवी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना गुलाम मुहम्मद गुलज़ार और हुज्जतुल इस्लाम मौलाना गौहर हुसैन शामिल थे। वक्ताओं ने जमीनी स्तर पर शैक्षिक गतिविधियों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और लोगों से अपील की कि वे बच्चों और युवाओं की धार्मिक, बौद्धिक और नैतिक शिक्षा के लिए सक्रिय धार्मिक एवं शैक्षिक संस्थानों को भरपूर सहयोग और समर्थन दें।

सम्मेलन का संचालन हुज्जतुल इस्लाम सैयद तसद्दुक हुसैन नकवी ने किया।
वक्ताओं ने जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियान की ओर से पूरे क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने समाज की शैक्षिक और नैतिक नींव को और मजबूत करने के लिए लगातार सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।









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