मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 - 07:38
गलतियों को खूबसूरत समझना इंसान को गुमराही की ओर ले जाता है/इस्तिग़फ़ार सुधार का बेहतरीन ज़रिया है।उस्ताद पनाहियान

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली रज़ा पनाहियान ने कहा कि गलत कामों को अच्छा समझना इंसान को अपनी गलतियों पर कायम रखता है, जबकि वास्तविक सुंदरता को पहचानना और इस्तिग़फ़ार की आदत अपनाना इंसान की हिदायत और सुधार में मददगार साबित होता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली रज़ा पनाहियान ने आज टेलीविज़न कार्यक्रम ‘सम्ते ख़ुदा’ में बातचीत करते हुए क़ुरआन की आयतों की रोशनी में कहा कि कभी-कभी इंसान अपनी गलतियों को सही साबित करने के लिए उन्हें अच्छा समझने लगता है। इस तरह वह अपनी इस्लाह करने के बजाय गलत रास्ते पर चलता रहता है।

उन्होंने सूरह फ़ातिर की आयत 8 का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को उसका बुरा काम अच्छा दिखाई देने लगता है, तो उसकी सही और गलत में अंतर करने की क्षमता प्रभावित होती है। शैतान भी इंसान के सामने गलत कामों को खूबसूरत बनाकर पेश करता है, जिससे वह हक़ के रास्ते से दूर हो सकता है।

हुज्जतुल इस्लाम पनाहियान ने कहा कि सुंदरता का एहसास केवल गुमराही का कारण नहीं बनता, बल्कि वास्तविक सुंदरता को पहचानना हिदायत का ज़रिया भी है। त्याग, क़ुर्बानी, इबादत और दूसरों की सेवा जैसे अच्छे कामों की खूबसूरती को समझने से इंसान उनकी ओर आकर्षित होता है। उन्होंने कहा कि कहानियों, फ़िल्मों, ऐतिहासिक घटनाओं और कला के माध्यम से भी अच्छे किरदारों और नेक कामों की खूबसूरती लोगों तक पहुँचाई जा सकती है।

उन्होंने इमाम हुसैन (अ.स.) की अज़ादारी की मजलिसों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन मजलिसों में अहलेबैत (अ.स.) की क़ुर्बानियों और त्याग के वाक़ियात बयान किए जाते हैं। इन घटनाओं से इंसान वास्तविक सुंदरता को समझ सकता है और रूहानी सुकून हासिल कर सकता है।

उन्होंने रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी अच्छाइयों को पहचानने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए पिता की मेहनत, बच्चों के लिए माँ की क़ुर्बानियाँ और सफ़ाई करने वाले कर्मचारी की सेवा भी क़ाबिले-क़द्र है। इंसान को चाहिए कि वह इन कामों की अहमियत समझे और दूसरों की मेहनत का सम्मान करे।

हुज्जतुल इस्लाम पनाहियान ने कहा कि अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय उन्हें सही साबित करने की कोशिश इंसान को बार-बार वही गलती करने के लिए प्रेरित करती है। इसके विपरीत, तौबा और इस्तिग़फ़ार इंसान को अपनी कमियों पर विचार करने और अपने व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद देते हैं।

बच्चों की परवरिश के संबंध में उन्होंने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को केवल गलत कामों से मना न करें, बल्कि उन्हें अच्छे कामों की खूबसूरती भी समझाएँ। इसी तरह गाड़ी, सोने और दौलत जैसी भौतिक चीज़ों की अनावश्यक प्रशंसा करने से बचना चाहिए, ताकि बच्चों के मन में खुशहाली का विचार केवल धन-दौलत और भौतिक संसाधनों तक सीमित न रह जाए।

अंत में उन्होंने कहा कि वास्तविक सुंदरता को पहचानना, अपनी गलतियों को स्वीकार करना और इस्तिग़फ़ार की आदत अपनाना इंसान के नैतिक सुधार और बेहतर जीवन के लिए बेहद ज़रूरी है।

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