हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,एक रिपोर्ट के अनुसार , मुंबई/ ख़ोजा शिया इस्ना अशरी जामा मस्जिद, पालागली में जुमआ की नमाज़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी की इमामत में अदा की गई।
उन्होने ख़ुत्बे में कहा कि अय्यामे फ़ातिमिया, पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम की प्रिय पुत्री हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत की याद मनाने के दिन हैं। रसूले ख़ुदा (स.ल.) की निगाह में आपका असाधारण स्थान था और आपकी महानता व फ़ज़ीलत के संबंध में मासूम इमामों अलैहिमुस्सलाम से अनेक रिवायतें मिलती हैं।
मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की एक रिवायत का उल्लेख करते हुए कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) को ‘सिद्दीक़ा-ए-कुबरा’ कहा गया है। इसी रिवायत में आपकी सही पहचान और मरिफत को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। उन्होंने कहा कि मासूम इमामों (अ.स.) ने हज़रत ज़हरा (स.ल.) के जो फ़ज़ाइल बयान किए हैं, वे आपके वास्तविक मकाम और मरतबे को स्पष्ट करते हैं।
उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की एक अन्य रिवायत का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी नबी की नबूवत उस समय तक पूर्ण नहीं होती, जब तक वह हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के फ़ज़ाइल और उनसे प्रेम का इकरार न करे। मौलाना ने कहा कि अहलेबैत (अ.स.) के फ़ज़ाइल बयान करने वाली रिवायतों पर अनावश्यक आपत्तियाँ करने के बजाय उनकी शिक्षाओं को समझने और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता है।
हज़रत ज़हेरा (स.ल.) के लक़ब ‘ज़हेरा’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने एक रिवायत का उल्लेख किया, जिसके अनुसार अल्लाह तआला ने आपको अपनी अज़मत से पैदा किया और आपके नूर से आसमान व ज़मीन रोशन हुए। उन्होंने कहा कि इन रिवायतों से हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की महानता और अल्लाह की बारगाह में आपके उच्च स्थान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
इमाम ए जुमा ने कहा कि जब अल्लाह तआला ने हज़रत ज़हरा (स.ल.) को तमाम अंबिया पर फ़ज़ीलत अता की है, तो आपको तकलीफ़ पहुँचाना और आपकी तौहीन करना अत्यंत गंभीर कार्य है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) की महानता को समझने के लिए रसूले ख़ुदा (स.ल.) के उन फ़रमानों को भी ध्यान में रखना चाहिए, जिनमें आपने अपनी बेटी से प्रेम और उनके सम्मान का इज़हार किया है।
मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने अहलेबैत (अ.स.) की सीरत का उल्लेख करते हुए कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल ) के मसायब का ग़म मासूम इमामों (अ.ल.) के दिलों में हमेशा ताज़ा रहा। उन्होंने इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम से संबंधित एक घटना बयान की कि आप अपनी जद्दा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) के मसायब को याद करके गिरया फ़रमाते थे। इससे पता चलता है कि अहलेबैत (अ) के निकट हज़रत ज़हरा (स) के मसायब की याद कितनी अहमियत रखती है।
अंत में उन्होंने अय्यामे फ़ातिमिया के दौरान मजलिसों, अज़ादारी, मस्जिदों और इमामबाड़ों के सम्मान पर ज़ोर देते हुए कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा सलामुल्लाह अलैहा का ग़म अहलेबैत (अ.स.) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इन दिनों में आपकी सीरत, फ़ज़ाइल और मसायब को याद करने के साथ-साथ मजलिसों की पवित्रता और सम्मान को भी बनाए रखना चाहिए।
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