शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 - 22:33
ईरान की ताकत का राज़ राष्ट्रीय एकता और जनएकजुटता है

तेहरान के अस्थायी इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद मुहम्मद हसन अबूतुराबी फ़र्द ने राष्ट्रीय एकता को ईरान की ताकत, सुरक्षा और विकास का आधार बताते हुए कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों और दबावों का सामना करने के लिए सरकार, जनता और व्यवस्था के बीच एकता और आपसी सहयोग बनाए रखना ज़रूरी है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद मुहम्मद हसन अबूतुराबी फ़र्द ने तेहरान में जुमे की नमाज़ के खुत्बों में कहा कि इस्लामी क्रांति पिछले आधे शताब्दी के दौरान इस्लामी दुनिया और क्षेत्र में होने वाले महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का एक अहम मोड़ रही है। इस क्रांति ने ईरानी राष्ट्र को अपनी धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान पर ध्यान देने तथा बाहरी दबावों के सामने दृढ़ रहने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की ताकत, स्थिरता, सुरक्षा और विकास के लिए बुनियादी महत्व रखती है। इमाम ख़ुमैनी (रह.) और क्रांति के शहीद नेता ने भी ईरानी राष्ट्र और इस्लामी उम्मत की एकता को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईरान ने आठ साल के युद्ध सहित विभिन्न कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन राष्ट्रीय एकता ने देश को इन चुनौतियों से उबरने में मदद की।

राष्ट्रीय एकता ईरान की अनमोल पूंजी

इमामे जुमा तेहरान ने कहा कि ईरान ने विश्व युद्धों, विदेशी हस्तक्षेप, 28 मुर्दाद (19 अगस्त 1953) के अमेरिकी समर्थन से हुए तख्तापलट और आठ साल के युद्ध जैसे कठिन दौर से गुज़रकर महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं। हालिया 12 दिवसीय युद्ध और अमेरिका तथा इज़राइल के साथ रमज़ान युद्ध के दौरान भी राष्ट्रीय एकता और जनएकजुटता का महत्व स्पष्ट रूप से सामने आया।

उन्होंने सशस्त्र बलों के प्रदर्शन और जनता की एकजुटता का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता ईरान की अनमोल पूंजी है, जिसकी रक्षा करना ज़रूरी है। प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर अधिकारियों और सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को ऐसे कदम उठाने और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जो इस एकता को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

अमेरिकी विश्लेषक का स्वीकारोक्ति

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अबूतुराबी फ़र्द ने अमेरिकी काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशंस के प्रमुख माइकल फ़्रोमैन के एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि इस विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका हालिया युद्ध में अपने निर्धारित उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका। उनके अनुसार, ईरान की ताकत कम करने की कोशिशों के विपरीत, युद्ध के परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर ईरान की भूमिका को और मज़बूत कर सकते हैं।

उन्होंने हुर्मुज़ जलडमरूमध्य के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति और सीमित सैन्य संसाधनों को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षमता में बदल दिया है। इससे पता चलता है कि किसी देश की ताकत केवल पारंपरिक सैन्य संसाधनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी भौगोलिक स्थिति और अन्य क्षमताएँ भी वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा राजनीतिक मामलों को प्रभावित कर सकती हैं।

आर्थिक दबावों का सामना करने के लिए योजना बनाना ज़रूरी

इमामे जुमा तेहरान ने चेतावनी दी कि ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध बढ़ाने और समुद्री मार्गों में बाधाएँ उत्पन्न करने की कोशिशें देश की जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को आर्थिक समस्याओं की पहचान करनी चाहिए, उनके समाधान के लिए प्रभावी योजनाएँ बनानी चाहिए और देश के सभी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उनके अनुसार, प्रतिबंध भी अमेरिका को उसके इच्छित परिणाम हासिल कराने में सफल नहीं हुए हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता बनाए रखते हुए आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास जारी रखना आवश्यक है, ताकि ईरान अपनी उपलब्धियों को मज़बूत करते हुए सम्मान और ताकत के साथ आगे बढ़ सके।

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