हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत ‘अल-काफ़ी’ किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام باقر علیهالسلام:
مَثَلُ الْحَرِیصِ عَلَی الدُّنْیَا مَثَلُ دُودَةِ الْقَزِّ؛ کُلَّمَا ازْدَادَتْ مِنَ الْقَزِّ عَلَی نَفْسِهَا لَفًّا کَانَ أَبْعَدَ لَهَا مِنَ الْخُرُوجِ حَتَّی تَمُوتَ غَمًّا.
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने फ़रमाया:
“दुनिया का लालची व्यक्ति रेशम के कीड़े की तरह है। रेशम का कीड़ा जितना अधिक अपने चारों ओर रेशम का धागा लपेटता जाता है, उसके लिए अपने खोल से बाहर निकलना उतना ही कठिन होता जाता है, यहाँ तक कि वह दुख और पीड़ा से मर जाता है।”
अल-काफ़ी, भाग 2, पेज 316।
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