हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लाम मे शराब पीना हराम है और इसे एक गंभीर खतरा बताता है क्योंकि यह मानवीय तर्क और नैतिक चेतना को नष्ट कर देता है। शराब का सेवन मानसिक बीमारी, अतार्किक और हिंसक व्यवहार तथा अपराध का एक प्रमुख कारण है, यही कारण है कि इस्लाम ने इसके नुकसानों को देखते हुए इसे प्रतिबंधित किया है।
शराब के हराम होने के कारण
1. बुद्धि का नाश
शराब मानव बुद्धि को पंगु बना देती है, जो उसकी सबसे मूल्यवान क्षमता है। आम धारणा यह है कि शराब केवल नशे की हालत में ही दिमाग पर असर करती है, लेकिन शोध से पता चलता है कि लगातार शराब का सेवन करने से व्यक्ति धीरे-धीरे पूर्ण पागलपन की ओर अग्रसर हो जाता है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में 85 प्रतिशत मानसिक रोगियों को शराब की लत के कारण पागलखाने में भर्ती कराया गया।
2. आपराधिक एवं अनैतिक कृत्य
विवेक के निलंबन के बाद, शराबी हत्या, चोरी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन जैसे गंभीर अपराध कर सकते हैं। इसीलिए इस्लाम ने इसे पूरी तरह हराम घोषित कर दिया है और इसके नुकसानों के बारे में पहले ही चेतावनी दे दी है।
3. शारीरिक और सामाजिक नुकसान
शराब न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए बल्कि सामाजिक व्यवस्था के लिए भी खतरा है। इससे बीमारियाँ, मानसिक बीमारियाँ, पारिवारिक व्यवस्था का विनाश तथा कई अन्य सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
इस्लाम की रणनीति
इस्लाम ने व्यक्ति, परिवार और समाज को इसके हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शराब पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया है। यह आज्ञा मानव कल्याण के लिए एक निवारक उपाय है जो समाज को शांति, तर्क और नैतिक शुद्धता की ओर ले जाती है।
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