हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह सवाल फिक्ही अहकाम से संबंधित है जिसमें जमात की नमाज़ और मुस्तहबी नमाज़ की ओर नियत बदलने से जुड़े शरई हुक्म की सटीक जानकारी देना जरूरी है ताकि इबादत सही तरीके से की जा सके।
आयतुल्लाह खामेनेई ने इस बारे में महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए हैं जो यहां रूची रखने वालो के लिए प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
सवाल:
इमाम जमात के देर से रूकूअ मे पहुचने की वजह से किसी व्यक्ति की नमाज़ फ़ुरादा हो जाती है:
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क्या वह अपनी नियत को मुस्तहब नमाज़ की ओर बदल सकता है?
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क्या मुस्तहबी नमाज़ की नियत ज़रूरी है कि नाफ़िला हो?
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क्या वह मुस्तहबी नमाज़ को बीच में तोड़कर फिर से जमात में शामिल हो सकता है?
जवाब:
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इसमें कोई समस्या नहीं है।
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जरूरी नहीं कि मुस्तहबी नमाज़ खासतौर पर नाफ़िला हो।
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वह अपनी मुस्तहबी नमाज़ को बीच में तोड़ सकता है और जमात में शामिल हो सकता है।
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