हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हुजरत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनई ने "बुनियादी वस्तुओं की जमाखोरी" से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है। जिसे शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
बुनियादी वस्तुओं की जमाखोरी का हुक्म
सवाल: शरई नज़रिए से किन चीज़ों की जमाखोरी करना हराम है? क्या जमाखोरों को आर्थिक सज़ा देना आपकी नज़र में जायज़ है?
जवाब: जमाखोरी का हराम होना — जैसा कि रिवायातों में आया है और मशहूर नज़र भी यही है — सिर्फ चार अनाजों (गेहूँ, जौ, खजूर, किशमिश) और घी तथा वनस्पति तेल (जिसकी समाज के विभिन्न तबकों को ज़रूरत हो) पर लागू होती है।
लेकिन अगर सार्वजनिक लोकहित माँग करे तो इस्लामी हुकूमत को यह अधिकार है कि वह लोगों की दूसरी ज़रूरत की चीज़ों की जमाख़ोरी से भी रोके। और अगर शासक इसे मुनासिब समझे तो जमाखोरों पर आर्थिक सज़ा देना भी कोई हर्ज नहीं है।
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