हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने सोने के व्यापार से जुड़े एक सवाल के जवाब में फ़रमाया है, जो रुचि रखने वालों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
सवालः एक सोने की खरीद-फरोख्त के कार्यक्रम में यह तरीका अपनाया जाता है कि आपके सोने का उपयोग किया जाता है और आपको यह अवसर दिया जाता है कि आप अपने सोने को सिक्के (शमश) और अन्य चीज़ों के उत्पादन चक्र में लगाएँ, और निर्धारित लाभ प्रतिशत के अनुसार उसकी मात्रा बढ़ाएँ। अवधि समाप्त होने पर मूल सोना और उसका लाभ आपके सोने के कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है। क्या यह लेन-देन सही (जायज़) है?
उत्तर: यदि ये गतिविधियाँ नाममात्र (सिर्फ कागजी या फर्जी) न हों, बल्कि वास्तविक रूप से की जाएँ, और सोने का मालिक दूसरे पक्ष (संचालक) को वकालत (अधिकार) दे दे कि वह उसके सोने के साथ चीज़ें बनाने, खरीदने और बेचने का काम शरई और कानूनी तरीके से करे, और यदि लाभ होता है तो उसका एक निश्चित हिस्सा सोने के मालिक को दे, तो इसमें कोई शरई समस्या नहीं है।
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