शुक्रवार 1 मई 2026 - 09:14
शरई अहकाम | विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति अविश्वास

हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने 'विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति अविश्वास' से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने 'विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति अविश्वास' से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए प्रश्न तथा उसके उत्तर का पाठ प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रश्न: क्या एक दिखने में अच्छा और सतही तौर पर परहेज़गार शिया व्यक्ति का विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति अविश्वास रखना उसे फ़ासिक़ बना देता है? विलायत-ए-फ़क़ीह के प्रति अविश्वास, व्यक्ति के धर्म को कितना नुक़सान पहुँचाता है?

उत्तर: इस्लामिक समाज के नेतृत्व और मुस्लिम समुदाय के सामाजिक मामलों के प्रबंधन में विलायत-ए-फ़क़ीह, हर युग और समय में, सही मज़हब 'इस्ना अशरिया' के स्तंभों में से एक है, जिसकी जड़ें इमामत के सिद्धांत में हैं।

यदि कोई व्यक्ति अपनी राय में, तर्क और प्रमाण के आधार पर, इस मान्यता का अविश्वास करने तक पहुँचता है, तो वह उज्र के योग्य है, लेकिन फिर भी, हर बालिग़ व्यक्ति, चाहे वह स्वयं कोई फ़क़ीह ही क्यों न हो, के लिए मुस्लिम समुदाय के शासक और वली अम्र मुस्लिमीन के शासनादेशों का पालन करना अनिवार्य है।

और किसी के लिए भी यह अनुमति नहीं है कि वह इस बहाने कि 'वह स्वयं अधिक योग्य है', शासन-प्रबंधन करने वाले का विरोध करे। और यदि विलायत-ए-फ़क़ीह में अविश्वास इन शासनादेशों की अवज्ञा करने का कारण बने, तो अवज्ञा करना भी जायज़ नहीं है।

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