हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई ने "सोशल नेटवर्क के चैनल और ग्रुपों में सदस्यता" के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए प्रश्न और उसके उत्तर का पाठ प्रस्तुत किया जा रहा है।
सोशल नेटवर्क के चैनल और ग्रुपों में सदस्यता
प्रश्न: सामान्य तौर पर, अगर किसी व्यक्ति का सोशल नेटवर्क (जैसे टेलीग्राम, सरोश, ईटा आदि) पर कोई चैनल है, तो क्या उसकी कोई मालियत (आर्थिक मूल्य) होती है या नहीं? अर्थात, क्या उसकी अनुमति के बिना उसके चैनल का सदस्य बन सकता है? (इस धारणा के साथ कि चैनल पंजीकृत नहीं है और कानून के विरुद्ध भी नहीं है।)
उत्तर: यदि इसे व्यक्तियों की निजता (प्राइवेसी) का उल्लंघन समझा जाए, तो यह जायज़ नहीं है।
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