हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामनेई ने किराया न देने का नमाज़ के सही होने पर असर से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रश्न: यदि कोई किरायेदार उदाहरण के लिए तीन महीने तक मकान का किराया न दे, तो क्या मकान मालिक यह कह सकता है कि उस घर में पढ़ी जाने वाली आपकी नमाज़ सही नहीं है?
उत्तर: यदि किराये का एग्रीमेंट सही तरीके से हुआ हो, तो जब तक किराये की अवधि समाप्त नहीं होती, उस घर में रहना, उसका उपयोग करना और वहाँ इबादत (नमाज़ आदि) करना सही है और उसमें कोई समस्या नहीं है।
हाँ, समय पर किराया न देना और भुगतान में लापरवाही करना जायज़ नहीं है और यह गलत काम माना जाएगा।
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