हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने “वक़्त से पहले नमाज़ पढ़ने” के विषय पर एक प्रश्न का उत्तर दिया है, जिसे शरई अहकाम मे रुचि रखने वालो के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
वक़्त से पहले नमाज़ पढ़ना
प्रश्न: यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय बाद, उदाहरण के लिए छह महीने के बाद, यह पता चले कि उसने इस अवधि में जो फज्र (सुबह) की नमाज़ें पढ़ी थीं, वे कुछ मिनट पहले समय से पहले पढ़ी गई थीं, तो क्या उसे इन छह महीनों की सभी फज्र की नमाज़ों की क़ज़ा करनी होगी?
उत्तर: पहली नमाज़ को छोड़कर बाकी सभी नमाज़ें (चाहे उन्हें अदा की नियत से ही पढ़ा गया हो) पिछले दिन की फज्र नमाज़ की क़ज़ा के रूप में मानी जाएँगी। इसलिए यदि केवल आख़िरी फज्र नमाज़ की क़ज़ा कर ली जाए तो यह पर्याप्त है।
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