हौज़ा समाचार एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह सिस्तानी ने "बच्चों के पालन-पोषण में ज़बरदस्ती की भूमिका" विषय पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दिया, जिसे पाठकों की सेवा में प्रस्तुत किया जा रहा है।
बच्चों के पालन-पोषण में ज़बरदस्ती की भूमिका
प्रश्न: बच्चों को नमाज़ और हिजाब के बारे में किस सीमा तक मजबूर किया जा सकता है?
उत्तर: जो बच्चे बालिग़ हो चुके हों, उनके संबंध में अम्र बिल-मअरूफ़ और नहीं अनिल-मुनकर का फ़र्ज़ अदा किया जाना चाहिए। लेकिन एहतियात-ए-वाजिब के अनुसार शरई हाकिम की अनुमति के बिना उन्हें मारना या इस प्रकार की कोई शारीरिक सज़ा देना जायज़ नहीं है। हाँ, कुछ सहायता या सुविधाएँ रोकने जैसे तरीक़ों का उपयोग किया जा सकता है।
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