हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामनेई (र) ने अस्थाई निकाह मे अवधि का ज़िक्र भूल जाने के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए सवाल और उसके जवाब का पाठ प्रस्तुत है।
सवाल: अगर स्त्री और पुरुष अस्थायी निकाह के समय अवधि निर्धारित कर लें, लेकिन निकाह का सीग़ा पढ़ते वक्त उन्हें "फ़िल मुद्दतिल मअलूमह" कहना भूल जाएं, तो क्या यह निकाह दाइम में बदल जाएगा?
जवाब: इसके दाइम निकाह में बदलने में एहतियात (सावधानी) का पक्ष रखा जाए।
एहतियात का आवश्यक पहलू यह है कि: अगर वे अलग होना चाहते हैं, तो तलाक का सीग़ा पढ़ा जाए, और अगर वे अलग नहीं होना चाहते हैं, तो नए सिरे से दाइम निकाह पढ़ा जाए।
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