शुक्रवार 26 जून 2026 - 07:04
कर्बला का ऐसा शहीद जिसकी शहादत पर इंसान नही इंसानीयत रोती हैः मौलाना अब्बास बाक़री

शहर की सभी इमामबारगाहों और अज़ाखानों में मजलिसों और मातम का सिलसिला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है, क्योंकि यौम-ए-आशूरा नजदीक आ रहा है। इस अवसर पर सभी स्थानों पर विदाई मजलिसें आयोजित की गईं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार। शहर की सभी इमामबारगाहों और अज़ाखानों में मजलिसों और मातम का सिलसिला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है, क्योंकि भारत मे आज आशूरा का दिन है। इस अवसर पर सभी स्थानों पर विदाई मजलिसें आयोजित की गईं।

लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला में “इमामत, ईलाही निज़ाम-ए-हयात” के शीर्षक से आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी ने कहा कि आशूरा की पूर्व रात्रि वह पवित्र रात है, जिसे इमाम हुसैन (अ) और उनके साथियों ने इबादत में बिताया था, इसलिए मोमिनों को भी इस रात को इबादत, ग़म और मातम में व्यतीत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) की कर्बला में दी गई कुर्बानी इंसान को सब्र, हिम्मत और सत्य पर डटे रहने का संदेश देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महान त्याग को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलना भी जरूरी है।

कर्बला का ऐसा शहीद जिसकी शहादत पर इंसान नही इंसानीयत रोती हैः मौलाना अब्बास बाक़री

मजलिस के दौरान मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक घटनाक्रम को बयान किया, जिसमें इमाम हुसैन (अ) के छह महीने के मासूम बेटे हज़रत अली असगर की शहादत का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि अली असगर वह शहीद हैं जिनकी शहादत पर केवल इंसान नहीं, बल्कि इंसानियत भी रोती है।

मजलिस में अली असगर का झूला भी बरामद किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। उपस्थित लोगों ने नम आंखों से हज़रत इमाम हुसैन (अ) को उनके मासूम बेटे की शहादत पर अज़ा और पुरसा पेश किया। इस अवसर पर सोजख्वानी जाहिद हुसैन ने की, जबकि पेशख्वानी अब्बास मुर्तजा और फखरी मेरठी ने अंजाम दी। अंजुमन-ए-इमामिया ने नोहाख्वानी और मातम किया।

इसके अलावा नमाज-ए-ज़ुहरैन के बाद अज़ाखाना शाह कर्बला वक्फ मंसबिया में “इमामत और कुरान” शीर्षक से एक और मजलिस आयोजित की गई, जिसे मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने संबोधित किया।

उन्होंने हज़रत अब्बास (अ) की बहादुरी और वफादारी का वर्णन करते हुए उनकी शहादत के मार्मिक दृश्य पेश किए, जिससे माहौल ग़मगीन हो गया। मजलिस के बाद हज़रत अब्बास (अ) के अलम की शबीह बरामद की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लिया और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।

शहर की अन्य इमामबारगाहों में भी नियत समय पर मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी रहा। मोहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत ज़किया ने बताया कि मगरिब की नमाज के बाद सभी इमामबारगाहों को आशूरा की रात के लिए खोल दिया गया, जहां अक़ीदतमंदो ने पूरी रात जागकर इमाम हुसैन (अ) की याद में ग़म और मातम किया।

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