मंगलवार 28 जुलाई 2026 - 08:46
छज्जुपुरा सादात में अशरा-ए-चेहलुम की मजलिसों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

कर्बला इज़्ज़त और इंसानियत का रास्ता है। इमाम हुसैन (अ.स.) के दर पर सभी बराबर हैं। यहां हर धर्म और वर्ग के लोग अकीदत के फूल पेश करते हैं, क्योंकि पूरी दुनिया जानती है कि 1400 वर्ष पूर्व कर्बला में दी गई उनकी कुर्बानी ने इंसानियत को नई ज़िंदगी दी और दीन-ए-नबी को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट अनुसार, उत्तर प्रदेश जनपद बिजनौर के हल्दौर क्षेत्र के गांव छज्जुपुरा सादात में अशरा-ए-चेहलुम हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के उनवान से आयोजित दस दिवसीय मजलिसों के दूसरे दिन पहली मजलिस दरगाह-ए-फातेमा तथा दूसरी मजलिस इमामबारगाह में आयोजित हुई। मजलिसों को क्रमशः मौलाना सैय्यद हैदर रज़ा नजफ़ी एवं मौलाना सलमान अब्बास बाराबंकी ने खिताब किया।
मीडिया प्रभारी शाही वास्ती के संचालन में आयोजित मजलिसों में मरसिया-ख़्वानी मोहम्मद रज़ा, मोहम्मद अब्बास, नायाब हैदर, मोहम्मद आलम एवं सालिम ज़ैदी ने की। पेशख़्वानी मौलाना मैहदी अब्बास ज़ैदी एवं रईस ज़ैदी ने, जबकि नौहाख़्वानी सालिम ज़ैदी एवं अम्मार ज़ैदी ने की।मौलाना सलमान अब्बास ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी को अपना बनाना है तो हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की तरह सब्र, सच्चाई और बेहतरीन किरदार अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने हक़ और बातिल की जंग में हक़ का साथ देते हुए अपनी तथा अपने अहलेबैत और अंसार की बेमिसाल कुर्बानी देकर दीन-ए-इस्लाम को बचाया। उन्होंने कहा कि कर्बला इज़्ज़त और इंसानियत का रास्ता है। इमाम हुसैन (अ.स.) के दर पर सभी बराबर हैं। यहां हर धर्म और वर्ग के लोग अकीदत के फूल पेश करते हैं, क्योंकि पूरी दुनिया जानती है कि 1400 वर्ष पूर्व कर्बला में दी गई उनकी कुर्बानी ने इंसानियत को नई ज़िंदगी दी और दीन-ए-नबी को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया। मजलिस के अंत में मौलाना ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की लाडली बेटी जनाबे सकीना (स.अ.) के दर्दनाक मसायब बयान किए, जिन्हें सुनकर अज़ादार अश्कबार हो गए। उपस्थित अज़ादारों ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की बारगाह में जनाबे सकीना (स.अ.) का पुरसा पेश कर ग़म-ए-अहलेबैत में शिरकत की।

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