हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , शेख़़ ज़कज़ाकी ने अबुजा स्थित अपने निवास पर इमाम हुसैन (अ.स.) के अरबईन ज़ियारत के लिए इराक जाने वाले पुरुष एवं महिला ज़ायरीन के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की।उन्होंने कहा कि अरबईन की पैदल यात्रा इस्लामी इतिहास की एक प्राचीन और महान परंपरा है।
कर्बला की घटना के बाद पहले अरबईन पर पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.) के महान सहाबी हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी (स.ल.) ने सबसे पहले यह ज़ियारत की थी।
शेख़ ज़कज़ाकी ने कहा कि अरबईन की पैदल यात्रा, पैग़म्बर (स.) के अहलुलबैत (अ.) से प्रेम, वफ़ादारी और हमदर्दी का प्रतीक है तथा यह इंसान को दीन की शिक्षाओं और अहलुलबैत (अ.) की शिक्षाओं के और क़रीब लाती है।
उन्होंने ज़ायरीन को नसीहत करते हुए कहा कि वे अपनी नीयत को केवल अल्लाह के लिए ख़ालिस रखें, इस्लामी अख़लाक़ का पालन करें और पूरी यात्रा के दौरान अपने व्यवहार को आदर्श बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि अरबईन के ज़ायरीन इस्लाम और अहलुलबैत (अ.स.) के श्रेष्ठ दूत हैं, इसलिए उनके आचरण से इस महान आध्यात्मिक आंदोलन की सही तस्वीर दुनिया के सामने पेश होनी चाहिए।
शेख़ ज़कज़ाकी ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन, जैसे हज या अरबईन, में कुछ लोगों से गलतियाँ हो सकती हैं, लेकिन कुछ व्यक्तियों के व्यवहार के आधार पर पूरी भीड़ या सभी श्रद्धालुओं को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने सभी ज़ायरीन के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सफल यात्रा की दुआ की।
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