शुक्रवार 7 अगस्त 2026 - 12:40
राह ए खुदा में इंफ़ाक़ करने से इंसान को हिकमत-ए-इलाही जैसी महान नेमत प्राप्त होती है। हुज्जतुल इस्लाम सैयद मोहसिन आज़ादी

हौज़ा / हौज़ा ए इल्मिया क़ुम के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मोहसिन आज़ादी ने कहा कि अल्लाह की राह में ख़ुलूस के साथ किया गया इंफ़ाक़ इंसान को हिकमत-ए-इलाही जैसी महान नेमत प्रदान करता है, जिसे पवित्र क़ुरआन ने "ख़ैर-ए-कसीर" कहा है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ा ए इल्मिया क़ुम के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मोहसिन आज़ादी ने कहा कि अल्लाह की राह में ख़ुलूस (निष्ठा) के साथ किया गया इंफ़ाक़ इंसान को हिकमत-ए-इलाही जैसी महान नेमत प्रदान करता है, जिसे पवित्र क़ुरआन ने "ख़ैर-ए-कसीर" अत्यधिक भलाई कहा है।

हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.अ.) के हरम में आयोजित तफ़्सीर-ए-क़ुरआन के व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा कि मुहर्रम और सफ़र के महीने अल्लाह के प्रतीकों के प्रचार-प्रसार, अहल-ए-बैत (अ.स.) की सेवा, ज़ायरीन की मेज़बानी और ज़रूरतमंदों की सहायता के सर्वोत्तम अवसर हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कार्य अल्लाह की राह में इंफ़ाक़ के उत्कृष्ट उदाहरण हैं और अल्लाह के निकट इनका महान प्रतिफल है।

उन्होंने सूरह अल-बक़रह की आयत 261 से 274 का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह तआला ने इंफ़ाक़ की तुलना ऐसी हरी-भरी खेती से की है, जो वर्षा के बाद कई गुना अधिक फल देती है। इसी प्रकार अल्लाह की प्रसन्नता के लिए खर्च किया गया धन भी असंख्य बरकतों और महान प्रतिफल का कारण बनता है।

हुज्जतुल इस्लाम सैयद मोहसिन आज़ादी ने कहा कि शैतान इंसान को गरीबी का भय दिखाकर इंफ़ाक़ से रोकता है, जबकि अल्लाह तआला इसके बदले मग़फ़िरत रोज़ी में वृद्धि और कई गुना बेहतर प्रतिफल का वादा करता है।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इंफ़ाक़ हमेशा पवित्र और श्रेष्ठ संपत्ति से किया जाना चाहिए, क्योंकि तभी उसका वास्तविक मूल्य और महत्व होता है।

उन्होंने आगे कहा कि इंसान के पास मौजूद सभी नेमतें अल्लाह की अमानत हैं। यदि उन्हें अल्लाह की प्रसन्नता के मार्ग में खर्च नहीं किया जाता, तो उनकी बरकत समाप्त हो सकती है।

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