हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,नोएडा दिल्ली/अरबईन (चेहल्लुम) के अवसर पर सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ से एक विशाल मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए सेक्टर-50 स्थित मस्जिद तक पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में हिंदू धर्म गुरुओं ने खिताब किया और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को सत्य और न्याय का प्रतीक बताया

मोमनीन काले वस्त्र पहनकर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। इस दौरान मातम किया गया और नौहाख़्वानी के माध्यम से कर्बला की महान कुर्बानी को याद किया गया।
चेहल्लुम, जिसे अरबी में अरबईन कहा जाता है, इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाने वाला शोक और श्रद्धांजलि का महत्वपूर्ण अवसर है।
जुलूस पूरे मार्ग में शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से आगे बढ़ा। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जुलूस का स्वागत किया तथा पेयजल सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। आयोजकों के अनुसार यह मातमी जुलूस प्रतिवर्ष निकाला जाता है, जिसमें शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
इस वर्ष भी विभिन्न समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर जुलूस में शिरकत की और अमन, इंसाफ तथा मानवता का संदेश दिया। जुलूस के दौरान कर्बला की घटना और इमाम हुसैन (अ.स.) के त्याग एवं बलिदान पर प्रकाश डाला गया।
जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पूरे मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई। पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जुलूस शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ इस मौके पर हिंदू धर्म गुरुओं ने भी तकरीर की,
अरबईन के मौके पर हिंदू धर्मगुरु पंडित विजय कुमार शर्मा ने कहां इमाम हुसैन और श्रीराम दोनों सत्य व धर्म के प्रतीक

अरबईन के अवसर पर भारत के प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक नेता एवं समाजसेवी पंडित विजय कुमार शर्मा ने इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी को सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने सत्ता या स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि हक़ और सच्चाई की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की।
पंडित शर्मा ने कहा कि कर्बला का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि जब भी अन्याय और अत्याचार बढ़ेगा, कर्बला का संदेश इंसानों को सत्य के पक्ष में खड़े होने की ताकत देता रहेगा।
उन्होंने भगवान श्रीराम का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम भी धर्म, न्याय और सत्य के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने अधर्म के विरुद्ध संघर्ष किया, उसी प्रकार इमाम हुसैन ने भी अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने से इनकार कर दिया।
पंडित विजय कुमार शर्मा ने कहा, "इमाम हुसैन ने हक़ और सच्चाई के लिए जान दी और श्रीराम भी हमेशा सत्य और धर्म के पक्षधर रहे। यदि हमें सच्चाई के मार्ग पर चलना है तो हमें कर्बला जाना होगा, अर्थात कर्बला के संदेश को अपने जीवन में अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि कर्बला जाने का वास्तविक अर्थ केवल एक स्थान की यात्रा करना नहीं, बल्कि अपने जीवन में सत्य, न्याय, त्याग और मानवता के मूल्यों को अपनाना है। यही संदेश आज के समाज को सबसे अधिक आवश्यक है।
उन्होंने अरबईन के विशाल जनसमूह का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों का इमाम हुसैन के प्रति प्रेम इस बात का प्रमाण है कि सत्य और न्याय की आवाज़ कभी दबाई नहीं जा सकती। उन्होंने इसे विश्व में शांति, भाईचारे और इंसानी एकता का अद्भुत प्रतीक बताया।
अंत में पंडित विजय कुमार शर्मा ने कहा कि इमाम हुसैन और भगवान श्रीराम जैसे महान आदर्श पूरी मानवता को यह शिक्षा देते हैं कि अन्याय के सामने कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से अपील की कि वे सत्य, न्याय, प्रेम और मानवता के साझा मूल्यों को अपनाकर समाज में सद्भाव और एकता को मजबूत करें।
इमाम हुसैन अ.स.की कुर्बानी को मानवता की मिसाल दी
भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशील जी
महाराज ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि कर्बला का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अपने संबोधन में गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत हमें यह संदेश देती है कि अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य और न्याय के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्ता या व्यक्तिगत लाभ के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि मानवता के मूल्यों और सच्चाई की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ महान बलिदान दिया। यही कारण है कि सदियां गुज़र जाने के बाद भी दुनिया इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी को सम्मान और श्रद्धा के साथ याद करती है।
गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि अर्बईन केवल शोक और स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के विचारों और संदेश को अपने जीवन में उतारने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि न्याय, त्याग, साहस और मानवता जैसे मूल्य कर्बला की सबसे बड़ी विरासत हैं।
उन्होंने कहा कि कर्बला हमें सिखाती है कि इंसान को परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। इमाम हुसैन (अ.स.) का जीवन और उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देती रहेगी।
कार्यक्रम में उन्होंने धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सभी धर्मों और परंपराओं के सम्मान की शिक्षा देती है। इमाम हुसैन (अ) की शिक्षाओं में मानवता के लिए जो संदेश है, वह हर समाज और हर वर्ग के लिए प्रासंगिक है।
अंत में गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि इमाम हुसैन (अ) की शहादत हमें सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने, त्याग की भावना अपनाने तथा मानवता की सेवा करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यही कर्बला की वह अमर विरासत है, जिसके कारण इमाम हुसैन (अ) को दुनिया आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करती है।
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