मंगलवार 18 अगस्त 2026 - 10:59
“कुरआन और इमाम हुसैन” के शीर्षक से ख़म्सा ए मजलिस; अज़ादारी के आखिरी दिनों में आध्यात्मिक और वैचारिक आयोजन

अज़ा के दिनों के आखिरी दिनों में हर साल की तरह इस साल भी “कुरआन और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम” के शीर्षक से पांच मजलिसों का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। लगभग दो दशकों से जारी इस वार्षिक कार्यक्रम में चांद रात से 4 रबीउल अव्वल तक कुरआन की तिलावत, भाषण, लेख पाठ, नौहाख़्वानी और मातम सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष भाषणों का मुख्य विषय कुरआन करीम और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आंदोलन के बीच संबंध रहा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल की तरह इस वर्ष भी अज़ा के आखिरी दिनों में “कुरआन और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम” के शीर्षक से पांच मजलिसों का आयोजन जोश और अकीदत के साथ किया गया। यह अनोखा कार्यक्रम पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार चांद रात से 4 रबीउल अव्वल तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें कुरआन की समझ, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की सीरत और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं को विभिन्न साहित्यिक और धार्मिक माध्यमों से उजागर किया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान कुरआन की तिलावत, लेख पाठ, भाषण, संचालन, तकरीर, नौहाख़्वानी और मातम सहित विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। इस अवसर पर हर साल एक मिसरा भी दिया जाता है, जिसके आधार पर शायर उसी काफिया और रदीफ़ की पाबंदी करते हुए अपना कलाम पेश करते हैं।

इस वर्ष का मिसरा था:

“सिनान की होगी तिलावत, हुसैन से मंसूब”

“कुरआन और इमाम हुसैन” के शीर्षक से ख़म्सा ए मजलिस; अज़ादारी के आखिरी दिनों में आध्यात्मिक और वैचारिक आयोजन

इस वर्ष पांच मजलिसों के भाषणों का मुख्य विषय “कुरआन और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आपसी संबंध” रहा। इसमें वक्ताओं ने कुरआन करीम और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आंदोलन के बीच गहरे संबंध, पैगाम-ए-कर्बला और कुरआनी शिक्षाओं की रोशनी में सैयदुश्शोहदा अलैहिस्सलाम की शहादत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष भी यह कार्यक्रम बेहद उत्साहपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में अपने महत्वपूर्ण चरण की ओर बढ़ रहा है। इस अवसर पर शायरों ने बहुत ही अनोखी और प्रभावशाली शायरी पेश की। कुछ शेरों में जोश, जागरूकता और समाज सुधार का ऐसा संदेश दिखाई दिया कि अगर इस संदेश को व्यापक रूप से समाज तक पहुंचाया जाए, तो यह कल्याण और सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

“कुरआन और इमाम हुसैन” के शीर्षक से ख़म्सा ए मजलिस; अज़ादारी के आखिरी दिनों में आध्यात्मिक और वैचारिक आयोजन

“और जब वे ईमान वालों से मिलते हैं तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, और जब अपने शैतानों के पास अकेले जाते हैं तो कहते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं, हम तो केवल मज़ाक कर रहे हैं।”

वक्ताओं ने विशेष रूप से “लَक़ूवा” शब्द की ओर ध्यान दिलाते हुए मुनाफिक़त के खतरनाक व्यवहार को समझाया।

वक्ताओं ने कहा कि मुनाफिक़ व्यक्ति ऊपर से इंसान को अपना साथी और शुभचिंतक दिखाई देता है, लेकिन अंदर से वह समाज और लोगों की बुनियाद को कमजोर करने की कोशिश करता रहता है। इसलिए समाज में ऐसे व्यवहार को पहचानना और लोगों को मुनाफिक़त तथा धोखे से जागरूक करना जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि हमारा जीवन ईमानी, सलमानी, अलवी, इरफानी, मुहम्मदी, हसनी और हुसैनी होना चाहिए और हमें कुरआन तथा अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

उपरोक्त आयत इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि कुछ लोगों की ऊपरी बातें ईमान वालों जैसी हो सकती हैं, लेकिन उनके अंदर और उनके वास्तविक इरादों में स्पष्ट अंतर होता है। इसलिए केवल दिखावे और दावों के बजाय इंसान के चरित्र और उसके कर्मों को मापदंड बनाना जरूरी है।

पांच मजलिसों के दौरान शहीद रहबर के चालीसवें दिन के अवसर पर भी शायरों और ज़ाकिरीन ने श्रद्धांजलि पेश की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने भावनाओं और अकीदत का इज़हार किया तथा इस्लामी गणराज्य ईरान के समर्थन में नारे भी लगाए।

कार्यक्रम के तीसरे दिन हौज़ा इल्मिया आयतुल्लाह ख़ामेनेई के संस्थापक मौलाना सैयद शमा मोहम्मद रिज़वी ने अपने संदेश में उपस्थित लोगों को शहीद रहबर की मार्गदर्शना और उनके विचारों पर अमल करने की हिदायत दी।

उन्होंने कहा कि हर कदम और हर चरण में शहीद रहबर की मार्गदर्शना को सामने रखना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन मासूमीन अलैहिमुस्सलाम की सीरत को व्यावहारिक आदर्श बनाकर गुज़ारा। उनका जीवन कुरआन, अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं और इस्लामी मूल्यों से जुड़ाव का व्यावहारिक उदाहरण था।

पांच मजलिसों का यह सिलसिला कुरआन करीम, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की सीरत, अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं और समाज सुधार के संदेश को एक साथ जोड़ते हुए अज़ादारी को वैचारिक और तरबीयती दिशा देने की एक उल्लेखनीय कोशिश के रूप में जारी है।

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