शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 - 16:17
उपमहाद्वीप के फ़िक़्ही और अक़ीदती समस्याओं के समाधान के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

क़ुम मुक़द्दसा में भारत और पाकिस्तान के दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक बैठक आयोजित हुई, जिसमें उपमहाद्वीप के धार्मिक, फ़िक़्ही और अक़ीदती मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा की गई। इस संस्था के अंतर्गत नियमित रूप से मासिक शैक्षणिक बैठकें आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा इल्मिया क़ुम में भारत और पाकिस्तान के विद्वानों तथा धर्मगुरुओं के बीच शैक्षणिक संबंधों को मज़बूत बनाने, आपसी विचार-विमर्श को बढ़ावा देने और उपमहाद्वीप के धार्मिक, फ़िक़्ही एवं अक़ीदती समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से मदरसा इमाम मुंतज़िर (अ.ज.), क़ुम मुक़द्दसा में वफ़ाक़ुल मदारिस के क़ुम विभाग के तत्वावधान में दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक बैठक आयोजित हुई।

इस बैठक में हौज़ा इल्मिया क़ुम में दर्स-ए-ख़ारिज पढ़ाने वाले विद्वानों और उस्तादों, आयतुल्लाह मुहम्मद बाक़िर मुक़द्दसी, आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद बाक़िर रिज़वी कश्मीरी, आयतुल्लाह मुहम्मद अब्बास सादिक़ी, आयतुल्लाह शाबान अली हादी, आयतुल्लाह शुजाअ हुसैन हुसैनी और वफ़ाक़ुल मदारिस के क़ुम विभाग के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली असग़र सैफ़ी ने भाग लिया।

उपमहाद्वीप के फ़िक़्ही और अक़ीदती समस्याओं के समाधान के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

बैठक की शुरुआत में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली असग़र सैफ़ी ने दर्स-ए-ख़ारिज के सभी उस्तादों का स्वागत किया और इस शैक्षणिक सभा के उद्देश्यों तथा उसके महत्व को स्पष्ट किया।

हुज्जतुल इस्लाम सैफ़ी ने कहा कि इस समय हौज़ा इल्मिया क़ुम में भारत और पाकिस्तान से संबंध रखने वाले लगभग नौ वरिष्ठ विद्वान दर्स-ए-ख़ारिज की शिक्षण सेवाएँ दे रहे हैं। वफ़ाक़ुल मदारिस के क़ुम विभाग का उद्देश्य इन विद्वानों का परिचय भारत और पाकिस्तान के शैक्षणिक एवं धार्मिक हलकों में कराना तथा उपमहाद्वीप के आम लोगों और विद्वानों को पेश आने वाले महत्वपूर्ण फ़िक़्ही, अक़ीदती और धार्मिक मुद्दों पर उनके शैक्षणिक अनुभवों और विचारों से लाभ उठाना है।

उन्होंने इस प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए नियमित शैक्षणिक बैठकों के आयोजन का प्रस्ताव रखा, ताकि उस्ताद एक-दूसरे के शैक्षणिक अनुभवों से लाभ उठा सकें और उपमहाद्वीप के धार्मिक समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

उपमहाद्वीप के फ़िक़्ही और अक़ीदती समस्याओं के समाधान के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों के विचार और सुझाव

बैठक में दर्स-ए-ख़ारिज के उस्ताद आयतुल्लाह मुहम्मद अब्बास सादिक़ी ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसी शैक्षणिक बैठकों को निरंतर जारी रखने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्वानों के बीच शैक्षणिक चर्चा, विचारों के आदान-प्रदान और संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों की आवश्यकता आज के समय की महत्वपूर्ण ज़रूरत है।

दर्स-ए-ख़ारिज के उस्ताद आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद बाक़िर रिज़वी कश्मीरी ने इज्तिहाद के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान की विशिष्ट धार्मिक, फ़िक़्ही और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए हौज़ा इल्मिया क़ुम के योग्य विद्वानों को इज्तिहाद के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उपमहाद्वीप के विद्वानों की शैक्षणिक क्षमता को वहाँ के समाजों की धार्मिक आवश्यकताओं से जोड़ा जाए और उस्तादों के बीच शैक्षणिक संबंधों को और अधिक मज़बूत बनाया जाए।

उपमहाद्वीप के फ़िक़्ही और अक़ीदती समस्याओं के समाधान के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

दर्स-ए-ख़ारिज के उस्ताद आयतुल्लाह शाबान अली हादी ने मासिक के बजाय महीने में दो बार इन बैठकों के आयोजन का सुझाव दिया। उन्होंने हौज़ा इल्मिया नजफ़ अशरफ़ और क़ुम मुक़द्दसा में भारत तथा पाकिस्तान के विद्वानों को पेश आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक सभाएँ इन समस्याओं के समाधान, अनुभवों के आदान-प्रदान और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने में प्रभावी साबित हो सकती हैं। उन्होंने फ़िक़्ही मुद्दों के साथ-साथ अक़ायद से जुड़े मतभेद वाले विषयों पर भी शोध और शैक्षणिक चर्चा के महत्व तथा उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

दर्स-ए-ख़ारिज के उस्ताद आयतुल्लाह मुहम्मद बाक़िर मुक़द्दसी ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जामिअतुल मुंतज़िर के वरिष्ठ विद्वानों और वफ़ाक़ुल मदारिस के ज़िम्मेदारों का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रक्रिया की नींव रखी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थी।

उन्होंने हौज़ा इल्मिया में छात्रों और विद्वानों की शैक्षणिक गतिविधियों, उन्हें पेश आने वाली कठिनाइयों तथा उनकी शैक्षणिक क्षमता को बेहतर बनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की और उपयोगी विचार तथा सुझाव प्रस्तुत किए।

आयतुल्लाह मुक़द्दसी ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान के विद्वानों की शैक्षणिक क्षमता और साहित्यिक सेवाएँ अरब तथा ईरान के शैक्षणिक हलकों में परिचित हैं। हौज़ा इल्मिया क़ुम और नजफ़ अशरफ़ में उपमहाद्वीप के विद्वानों द्वारा दर्स-ए-ख़ारिज पढ़ाना एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक सेवा है। यदि ये वरिष्ठ विद्वान महीने में एक या दो बार एकत्र होकर अपने देशों के मुद्दों पर चर्चा करें और एक-दूसरे के अनुभवों से लाभ उठाएँ, तो इसके दूरगामी और उपयोगी परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे आम लोगों और विद्वानों की अनेक धार्मिक समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी।

दर्स-ए-ख़ारिज के उस्ताद आयतुल्लाह शुजाअ हुसैन हुसैनी ने भी इस बैठक को स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि विद्वानों और वरिष्ठ धर्मगुरुओं का एक स्थान पर एकत्र होकर शैक्षणिक चर्चा करना तथा साझा समस्याओं पर विचारों का आदान-प्रदान करना एक शुभ कदम है। इस प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए।

‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों की सहमति से वफ़ाक़ुल मदारिस के क़ुम विभाग के निदेशक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली असग़र सैफ़ी ने इस शैक्षणिक संस्था का नाम ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ रखने की घोषणा की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इस संस्था की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएँगी और शुरुआती तौर पर मासिक बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया। इन बैठकों के अंतर्गत सबसे पहले दर्स-ए-ख़ारिज के सभी उस्तादों की शैक्षणिक एवं शिक्षण यात्रा और जीवन-परिचय से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी। वफ़ाक़ुल मदारिस का क़ुम विभाग इसे पुस्तक के रूप में संकलित करके प्रकाशित करेगा।

उपमहाद्वीप के फ़िक़्ही और अक़ीदती समस्याओं के समाधान के लिए ‘दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों की संस्था’ की स्थापना की घोषणा

इसके बाद भारत और पाकिस्तान से प्राप्त होने वाले महत्वपूर्ण शैक्षणिक, फ़िक़्ही और अक़ीदती सवालों तथा समस्याओं को इन बैठकों के एजेंडे में शामिल किया जाएगा, ताकि संबंधित विषयों पर उस्तादों के शैक्षणिक विचारों, राय और मार्गदर्शन को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा सके।

इस अवसर पर यह भी निर्णय लिया गया कि इन बैठकों में होने वाली शैक्षणिक चर्चाओं और उनसे प्राप्त निष्कर्षों को लिखित रूप दिया जाएगा तथा भारत और पाकिस्तान के विद्वानों, धार्मिक संस्थानों, छात्रों और आम लोगों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि उपमहाद्वीप के धार्मिक हलके भी हौज़ा इल्मिया क़ुम की शैक्षणिक पूँजी से लाभ उठा सकें।

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दुआ और फ़ातिहा के साथ बैठक का समापन

बैठक के अंत में हौज़ा इल्मिया क़ुम के उस्ताद आयतुल्लाह मुहम्मद बाक़िर मुक़द्दसी ने दुआ कराई और इस शैक्षणिक संस्था की सफलता, भारत और पाकिस्तान के विद्वानों एवं धर्मगुरुओं तथा विशेष रूप से जामिअतुल मुंतज़िर के वरिष्ठ विद्वानों के लिए अधिक शैक्षणिक और धार्मिक सफलताओं की दुआ की। इस अवसर पर दिवंगत विद्वानों और वरिष्ठ धर्मगुरुओं की मग़फ़िरत के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा भी पढ़ी गई।

यह बैठक हौज़ा इल्मिया क़ुम में भारत और पाकिस्तान के दर्स-ए-ख़ारिज के उस्तादों के बीच शैक्षणिक संबंधों को व्यवस्थित करने, उपमहाद्वीप की धार्मिक समस्याओं पर विशेषज्ञतापूर्ण चर्चा को बढ़ावा देने और हौज़ा के शैक्षणिक अनुभवों को आम लोगों तथा विद्वानों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई।

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