हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अय्याम-ए-फातिमिया के अवसर पर आयोजित इस चार दिवसीय अलज़हरा यूथ कैंप में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कैंप का उद्देश्य युवा पीढ़ी की धार्मिक समझ, वैचारिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना था।

यह कैंप अय्याम-ए-फातिमिया के दौरान प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक आयोजित किया गया, जिसमें युवा छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की देखरेख हुज्जतुल इस्लाम अल्लामा सैयद मोहम्मद ज़की बाक़री और मस्जिद-ए-जाफरिया, अलीपुर के इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मोहम्मद युशा सहित अन्य धर्मगुरुओं ने की।
कैंप का आयोजन परवाना अली अकबर ने किया, जबकि कार्यक्रम की निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मुदब्बिर हुसैन ने संभालीं।
इस चार दिवसीय शैक्षिक एवं प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न धर्मगुरुओं, वक्ताओं और कई देशों से आए विद्वानों ने अपने ज्ञानवर्धक भाषणों और शिक्षाओं के माध्यम से युवाओं का मार्गदर्शन किया। इनमें हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना आगा अब्बास आबिदी (ब्रिटेन), हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद आदिल रज़ा (तंजानिया), हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद समीर अब्बास (अमेरिका), हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मोहम्मद अब्बास बाक़री और हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद नज़र अब्बास, प्रतिनिधि शूरा-ए-मंतक़ा-ए-जुनूब-ए-हिंद (ईरान) शामिल थे।

कैंप के दौरान कुल मिलाकर लगभग 48 शैक्षिक कक्षाएं आयोजित की गईं। इनमें से 36 कक्षाएं छात्राओं और 12 कक्षाएं छात्रों के लिए निर्धारित थीं।
इन सत्रों में 30 से अधिक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इनका मुख्य केंद्र हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) का जीवन, व्यक्तित्व तथा उनके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलू थे।
चर्चा के प्रमुख विषयों में हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) और पैग़ंबरी, हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) और विलायत, बच्चों की परवरिश में सीरत-ए-ज़हरा की भूमिका, वैवाहिक जीवन और एक आदर्श पत्नी के रूप में उनकी सीरत, पवित्र जीवन, ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया तथा माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार सहित विभिन्न धार्मिक, नैतिक, शैक्षिक और सामाजिक विषय शामिल थे।
धर्मगुरुओं और वक्ताओं के अतिरिक्त क़ुम और मशहद मुक़द्दस में शिक्षा प्राप्त कर चुकीं और अपनी पढ़ाई पूरी करने वाली शिक्षिकाओं ने भी इस शैक्षिक कार्यक्रम में योगदान दिया।

इस अवसर पर सैयदा वाफिया ज़हरा आबिदी (मदरसा बिन्तुल हुदा, क़ुम, ईरान) सहित अन्य शिक्षिकाओं ने छात्राओं के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित कीं। इन कक्षाओं में हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) की सीरत और शिक्षाओं के साथ हिजाब, पवित्रता और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही छात्राओं को सीरत-ए-फातिमी को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कैंप के शुरुआती तीन दिनों तक शैक्षिक और प्रशिक्षण कक्षाओं का सिलसिला जारी रहा, जबकि चौथे और अंतिम दिन एक सेमिनार और ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी शैक्षिक क्षमता और अर्जित ज्ञान का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के समापन पर कैंप में भाग लेने वाले 880 से अधिक छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बहुमूल्य पुरस्कार प्रदान किए गए।

यह चार दिवसीय कैंप युवा पीढ़ी, विशेष रूप से छात्राओं में धार्मिक चेतना, वैचारिक जागरूकता और नैतिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) की सीरत और अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।
कार्यक्रम के आयोजकों ने इस शैक्षिक एवं प्रशिक्षण गतिविधि में सहयोग देने वाले धर्मगुरुओं, शिक्षिकाओं, सहयोगियों और सभी प्रतिभागियों की सेवाओं की सराहना की। विशेष रूप से कार्यक्रम की सरपरस्ती करने वाले धर्मगुरुओं, आयोजक परवाना अली अकबर और कैंप के निगरान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मुदब्बिर हुसैन के प्रयासों को सराहनीय बताया।
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