शनिवार 10 जनवरी 2026 - 16:38
सुन्नी विद्वानो का सुप्रीम लीडर से अपना पूर्ण समर्थन की घोषणा / किसी भी फ़ितने के सामने हम सीसा पिलाई दीवार की तरह खड़े है

हौज़ा / ईरान के पश्चिमी राज्य आजरबाइजान के सुन्नी विद्वानो ने इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर के समर्थन की घोषणा कर एक बयान जारी किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पश्चिमी राज्य आजरबाइजान के 707 सुन्नी विद्वानो ने अपने एक बयान मे इस्लामी क्रांति के नजरयात से नई वाचा करते हुए सुप्रीम लीडर के साथ अपने पूर्ण समर्थन की घोषणा की है।

देश के हालिया हालात मे हर प्रकार के दंगे और हिंसा फ़ैलाने वाली की कड़ी निंदा करते हुए इस्लामी गणतंत्र ईरान की सुरक्षा को अपना शरई फ़रीज़ा समझते है। जिसका केंद्र सुप्रीम लीडर की ज़ात है। उनका धन्य जीवन इस देश के इक्तेदार और शिया व सुन्नी एकता का कारण है।

सुप्रीम लीडर का किसी भी प्रकार के अपमान की निंदा करते हुए स्पष्ट करते है कि इस जैसी निंदनीय घटना वास्तव मे गणतंत्र ईरान को कमज़ोर करने का षडयंत्र है जिसके सामने हस सीसा पिलाई हुई दीवार की भांति हर स्थिति मे डट कर मुक़ाबला करेंगे।

इस्लामी गणतंत्र ईरान शिया और सुन्नी बीसयो शहीदो के खून की ऋणि है। हम घोषणा करते है कि यह इस्लामी प्रणाली इस्लाम धर्म का किला और देश के इस्तिक़लाल का कारण है और कभी भी इस देश की ओर से आँख उठा कर देखने वालो को उनके घिनौने इरादो मे सफल नही होने देंगे।

ईरानी राष्ट्र के दुशमन विशेषकर अमेरिका और इजराइल और वैश्विक उपनिवेशवाद यह ले कि उनके हाथ ईरान के आंतरिक मुद्दो मे भी सफ़ल नही होंगे और हम उन्हे अपने राष्ट्रीय मुद्दो और शर्तो से किसी भी प्रकार का गलत लाभ उठाने की अनुमति नही देंगे।

हम अपनी जनता की जायज़ मागो की पूर्ण सर्मथन की घोषणा करते है। लेकिन हमारा मार्ग इन दंगाईयो और दुशमन के गुर्गो से बिलकुल अलग है और हम इन निर्दईयो के हाथो हुए लोगो के जान और माल की बड़ी क्षति की भरपूर निंदा करते है।

हम अधिकारीयो और प्रभारीयो से भी तकाज़ा करते है कि वो तुरंत जनता की जायज़ मांगो को सुने और उनका समाधान करे और उनके आर्थिक परिशानीयो को दूर करें।

ईरानी राष्ट्र की एकता और आपसी एकता ही इन मसाइल मे कामयाबीयो की चाबी है अतः इस बड़ी नेमत को हाथ से न जाने दे। इंशाल्लाह यही वहदत और यकजेहती इन सभी मुद्दो और मुशकेलात के हल का और मोजूदा संकट व मसाइल से निकलने का कारण बने।

उल्लेखनीय है कि इस बयानिया पर 707 सुन्नी विद्वानो के हस्ताक्षर कर चुके है। जिस मे तेज़ी से वृद्ध हो रही है।

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