हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने "आइम्मा ए मासूमीन (अ) के शोक के दिनों में काले कपड़ों के साथ नमाज़ पढ़ने" से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए प्रश्न और उसके उत्तर का पाठ प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रश्न: क्या आइम्मा ए मासूमीन (अ) के शोक के दिनों, महीने मुहर्रम व सफ़र, या रिश्तेदारों की मृत्यु पर काले कपड़े पहनकर नमाज़ पढ़ना मकरूह है?
उत्तर: काले कपड़े के साथ नमाज़ पढ़ना मकरूह है, लेकिन नमाज़ के अलावा इसकी क्राहत साबित नहीं है। साथ ही, अहले बैत (अ) के शोक के दिनों में शोक व्यक्त करने के लिए काले कपड़े पहनना अच्छा (निको) कार्य है।
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