हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने "नमाज़े जुमा के ख़ुतबे के दौरान मामूम के कर्तव्य" के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दिया है। शरईअहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए प्रश्न और उसके उत्तर का पाठ प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रश्न: अगर नमाज़े जुमा के ख़ुतबे के दौरान मामूम सुन्नत नमाज़ें, दुआएँ पढ़ने या बात-चीत करने में लग जाएँ, तो क्या उसमें कोई समस्या है?
उत्तर: एहतियात की बिना पर यह आवश्यक है कि नमाज़ी इमाम के ख़ुतबों को ध्यान से सुनें, चुप रहें और बात करने से बचें।
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